गुमला के जंगलों में पहुंचे दो हाथी, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
गुमला के पालकोट जंगल क्षेत्र में दो हाथियों के पहुंचने से ग्रामीणों में सतर्कता बढ़ गई है. वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.
गुमला(GUMLA): झारखंड में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. एक तरफ गिरीडीह में 25 हाथियों का झुंड देखने को मिला तो वहीं दूसरी तरफ गुमला जिले के पालकोट प्रखंड क्षेत्र के जंगलों में दो हाथियों के पहुंचने की सूचना मिली. इस सूचना के बाद आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया और टीम ने क्षेत्र में निगरानी शुरू कर दी. वन विभाग के अधिकारी और कर्मी मौके पर पहुंचकर हाथियों की गतिविधियों और उनके संभावित आवागमन वाले इलाकों की जानकारी जुटा रहे हैं. वनपाल कृष्णा महतो के अनुसार, दोनों हाथियों के गोनमेर पहाड़ के आसपास मौजूद होने की सूचना मिली है. विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है, ताकि हाथियों और ग्रामीणों के बीच किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो.
वन विभाग की ओर से आसपास के गांवों में लोगों को हाथियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है. ग्रामीणों को जंगल या हाथियों के संभावित रास्ते में अकेले नहीं जाने की सलाह दी गई है. इसके अलावा हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उनके आसपास भीड़ नहीं लगाने को कहा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथियों को देखकर उनके पीछे जाने, नजदीक जाकर तस्वीर लेने या वीडियो बनाने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. वनपाल कृष्णा महतो ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों को डराने, भगाने या किसी भी तरह से परेशान करने का प्रयास न करें. ऐसा करने से हाथी आक्रामक हो सकते हैं और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. विभाग का प्रयास है कि हाथियों को बिना परेशान किए सुरक्षित रूप से जंगल क्षेत्र में रखा जाए और उन्हें आबादी वाले इलाकों की ओर आने से रोका जा सके. अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी या उनके गांव के आसपास दिखाई देने की स्थिति में खुद कोई कदम उठाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें. विभाग की सक्रिय निगरानी का उद्देश्य मानव और हाथियों के बीच टकराव की किसी भी संभावित स्थिति को रोकना है.