गुमला में रक्षाबंधन की धूम, बहनों ने बांधी राखी तो भइयों ने निभाया साथ का वादा
गुमला जिले में रक्षाबंधन का पर्व उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया.बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की, जबकि भाइयों ने हमेशा साथ देने का भरोसा दिया.
गुमला (GUMLA): जिले में भाई-बहन के स्नेह और विश्वास को समर्पित रक्षाबंधन का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया. सुबह से ही घरों में त्योहार की तैयारियां शुरू हो गईं. बहनों ने पूजा की थाली सजाकर भाइयों को तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और उनकी कलाई पर राखी बांधी. इस दौरान उन्होंने भाइयों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की.
वहीं, भाइयों ने बहनों को उपहार देकर अपना प्यार जताया और जीवन के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लिया. त्योहार के कारण परिवारों में उल्लास और अपनापन देखने को मिला.
बच्चों में भी दिखा राखी का खास क्रेज
रक्षाबंधन को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह रहा. छोटी बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां बांधीं. भाइयों ने भी अपनी बहनों को छोटे-छोटे उपहार देकर उनकी खुशी बढ़ाई. बच्चों के बीच राखी की रस्म ने पारिवारिक माहौल को और खुशनुमा बना दिया.
भाई -बहन के रिश्ते को मजबूत करता है पर्व
सावित्री कुमारी ने रक्षाबंधन को भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ाने वाला पर्व बताया. उनका कहना है कि उन्हें हर साल इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है. राखी बांधते समय बहन अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, सफलता और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती है. उनके मुताबिक, यह त्योहार केवल एक परंपरा नहीं बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का खास अवसर है.
संजय कुमार सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन का धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से विशेष महत्व है. भाई की जिम्मेदारी केवल बहन की सुरक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में उसका साथ देना भी इस रिश्ते का अहम हिस्सा है.
बाजार से घरों तक रही त्योहार की रौनक
रक्षाबंधन को लेकर गुमला के बाजारों में भी चहल-पहल रही. राखियों, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी के लिए लोग बाजार पहुंचे. बदलते समय के साथ त्योहार मनाने का अंदाज भले बदला हो, लेकिन भाई-बहन के बीच प्रेम, भरोसा और अपनापन आज भी इसकी सबसे मजबूत पहचान है. रक्षाबंधन ने एक बार फिर परिवारों को साथ आने और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर दिया.
रिपोर्ट – सुशील कुमार सिंह