गोड्डा: गोड्डा जिले के पुलिस परिवार में सब कुछ ठीक ठाक नही चला रहा है .निलंबित झारखण्ड पुलिस मेंस एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष की पत्नी रूबी देवी ने पुलिस अधीक्षक से पात्र लिखकर जीवन यापन भत्ता भुगतान करने की गुहार लगाई है .रूबी देवी ने कहा कि उनके पति ने ऐसा कोई कार्य नही किया जिसकी वजह से उन्हें पहले निलंबित किया गया और उसके बाद जीवन यापन भत्ता भी बंद कर दिया गया है .इस कदम से उनके पति बीमार हो गए और घर परिवार चलाना भी दूभर हो गया है .
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल चालक आरक्षी रामानुज प्रकाश मार्च महीने में अपने साथी आरक्षी को छुट्टी को लेकर नगर थाना प्रभारी के समक्ष पहुंचे थे .क्योंकि उक्त आरक्षी की रेल टिकट बनी हुई थी जिसे जगन्नाथ पूरी की यात्रा पर जाना था .पर नगर थाना प्रभारी द्वारा उक्त आरक्षी को ये कहकर छुट्टी देने से इनकार किया गया कि कई आरक्षी को उनके द्वारा छुट्टी दी गयी इसलिए जिला में पुलिस बल की कमी है .इसी बात पर चालक आरक्षी सह संघ के कोषाध्यक्ष रामानुज प्रकाश थोड़े अड़ गये थे .ये बात नगर थाना प्रभारी को नागवार गुजरी जिसकी शिकायत उनके द्वारा पुलिस अधीक्षक के पास की गयी .फिर क्या था पुलिस अधीक्षक द्वारा मार्च महीने की 9 तारीख को रामानुज प्रकाश को जीवन यापन भत्ता के साथ निलंबित कर दिया गया .
अप्रैल माह से जीवन यापन भत्ता भी रोक दिया गया
इसके बाद भी पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार द्वारा 10 अप्रैल को एक और कार्यवाई करते हुए जीवन यापन भत्ता भी रोकने का आदेश जारी कर दिया .जो कारन दिया गया कि निलंबन अवधि में रामानुज प्रकाश को लाइन में हाजरी देने का आदेश दिया गया था जिसका अनुपालन उनके द्वारा नही किया गया था .
मामला सिर्फ अनुशाशन का था या फिर इसके पीछे की कहानी कुछ और है ? क्या सिर्फ इन वजहों से निलंबित आरक्षी का जीवन भत्ता रोका जाना सही और जायज है ?जीवन भत्ता के बंद होने की अवधि में अगर आरक्षी या उनके परिवार के साथ कुछ अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?

