एक विसर्जन ऐसा भी: तालाब खुदवाने के बाद विसर्जन के लिए निकाली गई मां दुर्गा की प्रतिमा

मां दुर्गा की विदाई के लिए आमतौर पर श्रद्धालु विसर्जन स्थल तक जाते हैं, लेकिन गोड्डा के प्रसिद्ध कालीपीठ में इस बार विसर्जन की तस्वीर कुछ अलग रही. यहां विसर्जन स्थल को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण पूजा संपन्न होने के बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमा पंडाल में विराजमान रही.

एक विसर्जन ऐसा भी: तालाब खुदवाने के बाद विसर्जन के लिए निकाली गई मां दुर्गा की प्रतिमा

गोड्डा (GODDA): मां दुर्गा की विदाई के लिए आमतौर पर श्रद्धालु विसर्जन स्थल तक जाते हैं, लेकिन गोड्डा के प्रसिद्ध कालीपीठ में इस बार विसर्जन की तस्वीर कुछ अलग रही. यहां विसर्जन स्थल को लेकर पैदा हुए विवाद के कारण पूजा संपन्न होने के बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमा पंडाल में विराजमान रही. आखिरकार आयोजकों ने कालीपीठ परिसर में ही जेसीबी से तालाब खुदवाया और उसमें पानी भरने के बाद रविवार को प्रतिमा विसर्जन के लिए निकाली गई. प्रशासन और मंदिर कमेटी के बीच बने गतिरोध के बीच संपन्न हुआ यह विसर्जन पूरे मामले को लेकर चर्चा का विषय बन गया.

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पहले तय हुआ राजकचहरी तालाब, फिर बदल गया निर्णय
कालीपीठ मंदिर कमेटी के अनुसार यहां पिछले चार वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इस वर्ष भी पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रशासन ने 22 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की थी. कमेटी का दावा है कि राजकचहरी तालाब को विसर्जन स्थल तय किया गया था. इसी आधार पर आयोजकों ने तैयारियां शुरू कर दी थीं. लेकिन बाद में विसर्जन स्थल बदलने के निर्देश से पूरा कार्यक्रम उलझ गया और विवाद की स्थिति पैदा हो गई.

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नए स्थल तक रास्ता नहीं, बड़ी प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की आशंका
आयोजकों का कहना है कि प्रशासन ने राजकचहरी तालाब के बजाय दूसरे तालाब में विसर्जन करने का निर्देश दिया. लेकिन नए स्थल तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं था. बड़ी प्रतिमा को वहां तक ले जाना मुश्किल था और इस दौरान प्रतिमा के खंडित होने की आशंका भी थी. कमेटी के सदस्यों के मुताबिक, इसी समस्या के कारण वे नए स्थल पर विसर्जन के लिए तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन धार्मिक परंपराओं और पूरे सम्मान के साथ होना चाहिए.

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पूजा खत्म, लेकिन मां की विदाई पर लगा रहा पेच
विसर्जन स्थल को लेकर बनी असहमति के कारण निर्धारित तिथि बीत गई, लेकिन प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो सका. पूजा संपन्न होने के बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमा पंडाल में स्थापित रही. आयोजकों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए समय रहते ठोस पहल नहीं होने से स्थिति लंबी खिंच गई. विसर्जन में देरी के बीच मंदिर कमेटी और आयोजकों के सामने प्रतिमा की सुरक्षित एवं सम्मानजनक विदाई की चुनौती बनी रही.

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जब परिसर में ही तालाब खोदकर निकाला गया समाधान
लगातार बने गतिरोध के बीच आयोजकों ने कालीपीठ परिसर में ही तालाब बनाने का निर्णय लिया. इसके बाद जेसीबी लगाकर तालाब खोदा गया और उसमें पानी भरवाया गया. व्यवस्था पूरी होने पर रविवार को मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के लिए निकाली गई. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. जिस प्रतिमा की विदाई निर्धारित समय पर नहीं हो सकी, उसके विसर्जन के लिए आयोजकों को परिसर में ही अलग से तालाब तैयार कराना पड़ा.

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विसर्जन व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल
कालीपीठ में हुई इस घटना ने विसर्जन स्थलों के निर्धारण और प्रशासनिक समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. आयोजकों का कहना है कि यदि पहले से तय स्थल को लेकर अंतिम समय में बदलाव नहीं होता या नए स्थल तक पहुंचने की समुचित व्यवस्था होती, तो विसर्जन में देरी से बचा जा सकता था. हालांकि, निर्णय बदलने के पीछे प्रशासन का क्या पक्ष रहा, यह स्पष्ट होना बाकी है. फिलहाल, कालीपीठ में तालाब निर्माण के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन के लिए निकाली गई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक असामान्य विसर्जन की कहानी जरूर छोड़ दी.

रिपोर्ट: अजीत सिंह