Giridih By-Election : उपचुनाव भाजपा के लिए कैसे रहा है घातक? क्या गिरिडीह में टूटेगा मिथक, क्या तरकीब अपनाएंगें बदले चहरे?
झारखंड में उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए सुखद नहीं रहा है.गिरिडीह उपचुनाव झामुमो और भाजपा के लिए ख़ास है. झामुमो के लिए तो गिरिडीह का उप चुनाव महत्वपूर्ण है ही ,लेकिन भाजपा के लिए भी नाक की लड़ाई होगी
टीएनपी डेस्क: झारखंड में उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए सुखद नहीं रहा है. अगर आंकड़े पर गौर करें तो 2020 में दुमका में भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी. झामुमो के बसंत सोरेन जीते थे. 2020 में ही बेरमो उपचुनाव की बात हो तो कांग्रेस के अनूप सिंह को जीत मिली थी. भाजपा दूसरे स्थान पर थी. 2021 में मधुपुर उपचुनाव की चर्चा हो तो झामुमो के हफीजुल हसन चुनाव जीते थे. भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी. 2022 में मांडर उपचुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की चुनाव जीती थी. भाजपा दूसरे स्थान पर थी. 2023 में रामगढ़ उपचुनाव की बात हो तो आजसू की सुनीता चौधरी चुनाव जीती थी. 2023 में डुमरी की बात की जाए तो झामुमो की बेबी देवी चुनाव जीती थी. भाजपा ने आजसू उम्मीदवार को समर्थन किया था.
2024 में गांडेय उप चुनाव झामुमो की हुई थी जीत
2024 में गांडेय उप चुनाव की बात की जाए तो झामुमो की कल्पना सोरेन चुनाव जीती थी. भाजपा दूसरे स्थान पर रही. 2025 में घाटशिला की बात की जाए तो झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन चुनाव जीते , भाजपा दूसरे स्थान पर रही. अब गिरिडीह में भी उपचुनाव होने जा रहा है. 2019 से यहां झामुमो की जीत होती रही है. 2024 की आम चुनाव की बात की जाए, तो झामुमो में और भाजपा में बहुत करीबी मुकाबला था और लगभग 4000 वोटो से जीत- हार तय हुई थी. सुदिव्य कुमार सोनू ने निर्भय कुमार शाहबादी को हराया था.
झामुमो और भाजपा के लिए क्यों है साख का सवाल है गिरिडीह उपचुनाव ?
आइये आपको बताते हैं कि गिरिडीह उपचुनाव झामुमो और भाजपा के लिए क्यों है साख का सवाल ?झामुमो के लिए तो गिरिडीह का उप चुनाव महत्वपूर्ण है ही ,लेकिन भाजपा के लिए भी नाक की लड़ाई होगी। मध्य प्रदेश के सांसद और आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह पटेल को भाजपा ने झारखंड का प्रभारी बनाया है. छत्तीसगढ़ के सौरभ सिंह और बिहार के निवेदिता सिंह सह प्रभारी बने हैं. पवन साय को प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेवारी दी गई है. मतलब भाजपा ने संगठन के लगभग सभी बड़े चेहरों को बदल दिया है. ऐसे में अब गिरिडीह का उप चुनाव होगा। नवम्बर में चुनाव संभव हो सकता है. गिरिडीह में 2019 और 2024 में भाजपा को हार मिली थी.
भाजपा के नए चेहरों के लिए गिरिडीह उपचुनाव क्यों होगा लिट्मस टेस्ट?
भाजपा ने जो चेहरे बदले हैं, उनके लिए भी गिरिडीह का उप चुनाव लिटमस टेस्ट साबित होगा। झारखंड के दिवंगत मंत्री विधायक सोनू के निधन से गिरिडीह की सीट खाली हुई है. एक तरह से कहा जाए तो दिवंगत मंत्री की पत्नी का नाम झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से लगभग फाइनल माना जा रहा है. वह पार्टी की बैठकों में शामिल हो रही हैं. कह रही हैं कि पति के अधूरे कार्यों को पूरा करना उनका सपना है. सबसे बड़ा सवाल है कि भाजपा गिरिडीह चुनाव में किस पर भरोसा करेंगी? प्रदेश के नेता गिरिडीह के कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रहे हैं. स्थानीय स्तर पर सक्रियता, जातीय समीकरण और जीत की संभावना वाले नाम पर चर्चा हो रही है. गिरिडीह सदर के शहरी क्षेत्र में भाजपा का जनाधार है लेकिन पीरटांड़ जाते-जाते पार्टी पिछड़ जाती है. इसलिए इस बार हो सकता है कि भाजपा प्रदेश नेतृत्व पीरटांड़ क्षेत्र को भी निगाह में रखे.