BREAKING: सोनू दादा अमर रहें! पंचतत्व में विलीन हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, बेटे ने दी मुखाग्नि
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू पंचतत्व में विलीन हो गए. गिरिडीह में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ और बेटे ने मुखाग्नि दी.
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू पंचतत्व में विलीन हो गए. गिरिडीह में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ और बेटे ने मुखाग्नि दी.
गिरीडीह (GIRIDIH): झारखंड के मंत्री और गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू पंचतत्व में विलीन हो गए. गिरिडीह के हरसिंहरायडीह श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी. अंतिम विदाई के दौरान श्मशान घाट पर मौजूद लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को विदाई दी और “सोनू दादा अमर रहें” के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा. सुदिव्य कुमार सोनू की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झारखंड के कई बड़े नेता, मंत्री, अधिकारी, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हुए. मुख्यमंत्री समेत कई लोगों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया. इससे पहले जवानों ने दिवंगत मंत्री के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने सुदिव्य सोनू के आकस्मिक निधन को झारखंड के लिए बड़ी और अपूरणीय क्षति बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है. उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में संबल देने की प्रार्थना की. वहीं, विधायक कल्पना सोरेन ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
सुदिव्य कुमार सोनू ने करीब 37 वर्ष पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्राथमिक सदस्य के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने गिरिडीह नगर इकाई की जिम्मेदारी भी संभाली. शुरुआती दौर में उन्हें चुनावी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा. साल 2019 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद 2024 में लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए और हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. पार्टी संगठन और सरकार के बीच उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें झामुमो के अहम नेताओं में गिना जाता था.
सुदिव्य सोनू के निधन को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के लिए भी बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है. इससे पहले पार्टी कई जनाधार वाले नेताओं को खो चुकी है, जिनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, राजेंद्र सिंह और रामदास सोरेन जैसे नाम शामिल हैं. अब सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड की राजनीति में एक और प्रभावशाली युवा चेहरा हमेशा के लिए खामोश हो गया.