करोड़ों का अस्पताल भवन, 19 साल में नहीं हुआ एक भी इलाज! खंडहर बन रहा गढ़वा का स्वास्थ्य उपकेंद्र

गढ़वा के खरौंधी में करोड़ों की लागत से बना सरकारी अस्पताल वर्षों से बंद पड़ा है. भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है और आज तक एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ.

गढ़वा (GARHWA): झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड में करीब दो दशक पहले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से सरकारी अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था. वर्ष 2007 में बने इस स्वास्थ्य उपकेंद्र से स्थानीय लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन आज तक यहां एक भी मरीज का इलाज नहीं हो सका. लंबे समय से बंद पड़े इस भवन की हालत अब खंडहर जैसी हो गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, भवन में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है. वहीं, भवन में रखे कई कीमती सामान भी चोरी होने की बात कही जा रही है. लोगों का कहना है कि अस्पताल बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा शुरू नहीं होने से आज भी मरीजों को दूसरे केंद्रों या रांची और बनारस तक जाना पड़ता है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार ने भवन तो बनवा दिया, लेकिन अस्पताल को चालू कराने की दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई गई. खरौंधी उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा प्रखंड है, ऐसे में यहां बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत और भी ज्यादा है. ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के लोगों को छोटी-बड़ी बीमारी के इलाज के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है. अस्पताल भवन के आसपास सुरक्षा और देखरेख की व्यवस्था नहीं होने के कारण धीरे-धीरे इसकी हालत खराब होती चली गई. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भवन की जांच कराकर इसे जल्द से जल्द उपयोग में लाया जाए, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सरकारी संपत्ति बर्बाद होने से बच सके.

मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब सामने आता है कि इतने साल बीतने के बाद भी इस भवन को स्वास्थ्य विभाग ने औपचारिक रूप से हैंडओवर तक नहीं लिया है. गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ कनेडी के मुताबिक, यह भवन काफी पुराना मामला है और स्वास्थ्य विभाग को कभी हैंडओवर नहीं हुआ. ऐसे में सवाल यह है कि सरकारी राशि से तैयार हुए इस भवन की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है और इतने वर्षों तक स्वास्थ्य सुविधा शुरू क्यों नहीं हो सकी? अगर समय रहते भवन को उपयोग में लाया जाता, तो सीमावर्ती इलाके के हजारों लोगों को इसका लाभ मिल सकता था. अब जरूरत है कि पूरे मामले की जांच हो, भवन की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए और जिम्मेदारी तय करते हुए अस्पताल को जल्द शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं.

रिपोर्ट- धर्मेन्द्र कुमार