मौत के साए में चल रहा गढ़वा का सरकारी दफ्तर! जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर काम कर रहे अधिकारी और कर्मचारी

मौत के साए में चल रहा गढ़वा का सरकारी दफ्तर! जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर काम कर रहे अधिकारी और कर्मचारी

गढ़वा (GARHWA): एक ओर सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं. झारखंड के गढ़वा जिले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का कार्यालय इस कदर जर्जर हो चुका है कि यहां हर दिन काम करने वाले कर्मचारियों और अपनी समस्या लेकर आने वाले लोगों को हादसे का डर सताता रहता है. हालात ऐसे हैं कि दफ्तर में प्रवेश करने से पहले लोग भगवान का नाम लेकर अंदर जाते हैं.

गढ़वा जिले में स्थित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का भवन वर्षों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका है. छत और दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं, जबकि भवन के कई हिस्से कमजोर हो चुके हैं. इसके बावजूद विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और संवेदक रोजाना इसी भवन में बैठकर काम करने को मजबूर हैं.

स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि दफ्तर में काम करने से ज्यादा चिंता हर समय किसी बड़े हादसे की बनी रहती है. उनका कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि भवन के किसी भी हिस्से के गिरने का खतरा लगातार बना रहता है. बावजूद इसके विभाग का काम बाधित न हो, इसलिए सभी लोग भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों की भी परेशानी कम नहीं है. पेयजल से जुड़ी शिकायतें, योजनाओं की जानकारी या अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को भी इसी खस्ताहाल भवन में प्रवेश करना पड़ता है. कई लोगों का कहना है कि भवन की स्थिति देखकर अंदर जाने से भी डर लगता है.

विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि दोनों कार्यालय भवनों की हालत लगभग एक जैसी है. लंबे समय से भवन की मरम्मत या नए भवन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. ऐसे में हर दिन कर्मचारी और अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं. इस मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के गढ़वा के एसडीओ शहनवाज अंसारी और जूनियर इंजीनियर अंकित कुमार ने भी माना कि भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है. उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति से विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जा रही है.

अब सवाल यह है कि आम लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने वाले विभाग के कर्मचारी खुद कब सुरक्षित माहौल में काम कर पाएंगे. यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए कार्यालय की व्यवस्था नहीं की गई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि इस गंभीर समस्या पर जल्द फैसला लेकर कर्मचारियों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

रिपोर्ट : धर्मेन्द्र कुमार