हिंदू युवक से प्यार पड़ा भारी! 22 वर्षीय मुस्लिम इंजीनियर ने अपने ही परिवार पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, सुरक्षा के लिए पहुंची हाईकोर्ट

प्रेम संबंध के विरोध के बाद घर छोड़ने वाली 22 वर्षीय मुस्लिम इंजीनियर युवती ने झारखंड हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई है.

हिंदू युवक से प्यार पड़ा भारी! 22 वर्षीय मुस्लिम इंजीनियर ने अपने ही परिवार पर लगाया प्रताड़ना का आरोप, सुरक्षा के लिए पहुंची हाईकोर्ट

सिंहभूम (SINGHBHUM): अपनी जिंदगी का साथी चुनने का फैसला एक युवती के लिए इतना मुश्किल हो गया कि उसे अपना घर तक छोड़ना पड़ा. मामला सिंहभूम जिले की 22 वर्षीय मुस्लिम इंजीनियर युवती का है, जो एक हिंदू युवक से प्रेम करती है. आरोप है कि इस रिश्ते का पता चलते ही परिवार ने उसका विरोध शुरू कर दिया और उसे शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. अब युवती ने अपनी जान-माल की सुरक्षा और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार की रक्षा के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सोमवार को इस संवेदनशील मामले को लेकर हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की गई.

याचिका में युवती ने आरोप लगाया है कि उसके प्रेम संबंध की जानकारी परिवार को मिलने के बाद घर में विवाद शुरू हो गया. अंतरधार्मिक रिश्ता होने के कारण परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया. युवती का आरोप है कि उसके पिता ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट और प्रताड़ना की. उसे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान करने के साथ घर में कैद रखा गया. इतना ही नहीं, परिवार के सदस्यों और कुछ धार्मिक संगठनों की ओर से उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी कराने की कोशिश की जा रही थी. आरोप है कि उसकी शादी एक ऐसे व्यक्ति से कराने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसकी उम्र युवती से लगभग दोगुनी है और जो शिक्षित भी नहीं है.

लगातार मिल रही धमकियों और जबरन शादी के दबाव से परेशान होकर युवती ने घर छोड़ने का फैसला किया. इसके बाद उसने जमशेदपुर के काशीडीह स्थित ज्ञानदीप गर्ल्स पीजी हॉस्टल में शरण ली. याचिका के अनुसार, युवती ने अपनी पसंद से विवाह करने के लिए विशेष विवाह अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. इसके लिए उसने 10 अक्टूबर को संबंधित आवेदन जमा किया था.

युवती ने अपनी याचिका में कहा है कि वह बालिग है और भारतीय संविधान उसे अपनी पसंद से जीवन जीने तथा जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है. याचिका में उसकी जन्मतिथि 21 दिसंबर 2004 बताई गई है. उसका कहना है कि हॉस्टल में रहने के बावजूद उसे लगातार इस बात का डर सता रहा है कि परिवार के सदस्य या उनसे जुड़े लोग उसे जबरन वहां से उठा सकते हैं. इसी आशंका को देखते हुए उसने अदालत से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

अपनी सुरक्षा के लिए युवती ने साकची थाना प्रभारी और पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को आवेदन के साथ ईमेल भी भेजा है. उसने पुलिस प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि वह जमशेदपुर के संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष स्वतंत्र रूप से अपना बयान दर्ज करा सके. अब युवती ने हाईकोर्ट से भी अपनी जान-माल की रक्षा और बिना किसी दबाव के स्वतंत्र जीवन जीने के अधिकार को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है. मामले ने अंतरधार्मिक विवाह, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बालिग युवाओं के संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है.