स्टेशन बना, ट्रेन चली... बस यात्री सुविधा रास्ते में छूट गई! जामा स्टेशन की बदहाली पर बड़ा सवाल

दुमका जिला के जामा में रेलवे स्टेशन तो बन गया, पटरियों पर ट्रेन भी दौड़ने लगी, लेकिन यात्रियों की सुविधा शायद अभी रेलवे की फाइलों में ही सफर कर रही है.

दुमका: दुमका जिला के जामा में रेलवे स्टेशन तो बन गया, पटरियों पर ट्रेन भी दौड़ने लगी, लेकिन यात्रियों की सुविधा शायद अभी रेलवे की फाइलों में ही सफर कर रही है. स्टेशन के नाम पर प्लेटफॉर्म है, ट्रेन है और यात्रियों की परेशानी भी पूरी है, बस बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए जामा स्टेशन होने के बावजूद बस से सफर करना ज्यादा आसान नजर आता है.

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ट्रेन पकड़नी है तो पहले सड़क यात्रा कीजिए

स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क बनना शुरू हुआ था, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक काम अभी अधूरा है और कई जगह कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. बारिश में स्थिति और मुश्किल हो जाती है . यानी रेलवे ने ट्रेन तक पहुंचने का इंतजाम कुछ ऐसा किया है कि यात्री पहले सड़क यात्रा की परीक्षा पास करे, फिर रेल यात्रा का टिकट सोचे.

प्लेटफॉर्म पर झाड़ियां, गंदगी और सवालों का ढेर

स्टेशन परिसर के आसपास झाड़ियां और गंदगी पसरी होने की शिकायत स्थानीय लोगों ने की है. पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया जा रहा है. सुविधा विहीन स्टेशन होने से यात्रियों में नाराजगी भी देखी जा रही है.

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टिकट काउंटर भी है, लेकिन खुलता कब है यात्रियों को पता नहीं

जामा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों का दावा है कि टिकट काउंटर अक्सर बंद रहता है. ऐसे में सवाल बड़ा सीधा है, काउंटर टिकट देने के लिए है या सिर्फ स्टेशन की शोभा बढ़ाने के लिए? यात्री टिकट लेने पहुंचे और काउंटर बंद मिला तो फिर वे जाएं कहां?

काउंटर बंद, टीटीई चालू, यात्रियों की जेब पर असर

रेलवे यात्री तनिष्क यादव का कहना है कि टिकट काउंटर नहीं खुलने के कारण कई बार टिकट नहीं मिल पाता. बाद में ट्रेन में जांच के दौरान जुर्माना भरना पड़ता है. उनकी शिकायत है कि रेलवे को जुर्माना तो याद रहता है, लेकिन टिकट काउंटर खोलने की जिम्मेदारी याद नहीं रहती.

ट्रेन है, लेकिन लंबी दूरी का सफर फिर भी ‘बस’ से

छात्र विशाल यादव के अनुसार ट्रेन का परिचालन जरूर होता है, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को दुमका या बासुकीनाथ उतरना पड़ता है और वहां से वापस जामा आना पड़ता है. यानी स्टेशन जामा में है, मगर लंबी दूरी की यात्रा का फायदा उठाने के लिए यात्री को पहले दूसरे स्टेशन की यात्रा करनी पड़ती है.

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महिलाओं के लिए स्टेशन पर सुविधा ढूंढना भी चुनौती

महिला यात्री सोनम कुमारी ने बताया कि स्टेशन पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. शौचालय और पानी की सुविधा नहीं होने से उन्हें काफी परेशानी होती है. सवाल यह है कि जिस सुविधा की सबसे ज्यादा जरूरत महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को होती है, वही सुविधा स्टेशन से गायब क्यों है?

बारिश में स्टेशन पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती

स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने बताया कि स्टेशन तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति ठीक नहीं है. कई हिस्सों में कच्ची सड़क होने के कारण बारिश में परेशानी बढ़ जाती है. मतलब साफ है ट्रेन पकड़ने से पहले यात्री को सड़क और मौसम दोनों से मुकाबला करना पड़ता है.

रेलवे का अधिकारी नहीं मिला, यात्रियों ने खोल दी व्यवस्था की किताब

स्टेशन की स्थिति जानने के दौरान रेलवे के किसी अधिकारी या कर्मचारी से मुलाकात नहीं हो सकी. स्थानीय यात्रियों ने ही स्टेशन की समस्याओं की पूरी तस्वीर बताई। अब सवाल यह भी है कि जब यात्री रोज समस्या झेल रहे हैं, तो उसकी निगरानी करने वाली व्यवस्था मौके पर कब दिखाई देगी?

पत्र लिखते लिखते थक गए लोग, समस्या यथावत

स्थानीय लोगों का कहना है कि जामा स्टेशन की व्यवस्था सुधारने के लिए कई बार रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ. लोगों की शिकायत है कि आवेदन शायद पहुंचते हैं, जवाब भी कहीं तैयार होता होगा, बस सुविधा अब तक स्टेशन तक पहुंचने का रास्ता तलाश रही है.

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जामा स्टेशन या सिर्फ ट्रेन रुकने की जगह?

स्थानीय लोगों की शिकायतों को देखें तो जामा स्टेशन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ ट्रेन का परिचालन शुरू हो जाने से किसी जगह को यात्री सुविधा वाला स्टेशन माना जा सकता है? सड़क अधूरी, टिकट काउंटर को लेकर शिकायत, पानी और शौचालय का अभाव, जगह जगह गंदगी और लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव नदारथ, फिर स्टेशन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

बोर्ड पर ‘जामा स्टेशन’, यात्रियों की जुबान पर ‘सुविधा कब?’

जामा के लोगों की मांग है कि रेलवे स्टेशन को सिर्फ नाम और प्लेटफॉर्म तक सीमित न रखा जाए. सड़क, पेयजल, शौचालय, साफ, सफाई, टिकट काउंटर और पर्याप्त ट्रेन ठहराव जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं. आखिर यात्री ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट खरीदना चाहता है, समस्याओं का नहीं.

रिपोर्ट पंचम झा