हंसडीहा में बकरों की ‘सींग जंग’ पहुंची थाना, प्रेमचंद होते तो लिखते ‘दो बकरों की कथा’!

मुंशी प्रेमचंद की मशहूर कहानी ‘दो बैलों की कथा’ में पशुओं की संवेदना, स्वाभिमान और आपसी संबंधों की कहानी आपने पढ़ी होगी. लेकिन दुमका के हंसडीहा में बकरों की भिड़ंत की कहानी कुछ अलग ही मोड़ ले चुकी है

हंसडीहा में बकरों की ‘सींग जंग’ पहुंची थाना, प्रेमचंद होते तो लिखते ‘दो बकरों की कथा’!

Tnp desk: मुंशी प्रेमचंद की मशहूर कहानी ‘दो बैलों की कथा’ में पशुओं की संवेदना, स्वाभिमान और आपसी संबंधों की कहानी आपने पढ़ी होगी. लेकिन दुमका के हंसडीहा में बकरों की भिड़ंत की कहानी कुछ अलग ही मोड़ ले चुकी है. यहां सींग बकरों ने लड़ाए, चोट एक को लगी और इंसाफ मांगने उसकी मालकिन घायल बकरा लेकर थाना पहुंच गईं. बुधवार को सामने आए इस अनोखे मामले ने पुलिसकर्मियों को भी कुछ पल के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया.

बकरों की भिड़ंत, मालकिन की फरियाद!

मामला हंसडीहा थाना के पगवारा गांव का है. गांव की रहने वाली मोसमात राधिया अपने घायल बकरे को लेकर हंसडीहा थाना पहुंचीं. हाथ में आवेदन था और आरोप पड़ोसी हप्पू लाया के बकरे पर. महिला का कहना था कि दोनों बकरों के बीच हुई लड़ाई में उनके बकरे को गंभीर चोटें आई हैं. अब बकरों की इस सींग युद्ध में किसने पहले हमला किया, यह तो वही जानें, लेकिन मालकिन ने मामले को गांव की सीमा से निकालकर थाना तक पहुंचा दिया.

प्रेमचंद के बैल थे, यहां बकरों की बारी!

प्रेमचंद की कहानी में हीरा और मोती के जरिए पशुओं की भावनाओं और वफादारी को दिखाया गया था। हंसडीहा की इस घटना में कहानी का अंदाज जरूर बदल गया है। यहां न हीरा है, न मोती। यहां दो बकरे है जिनकी भिड़ंत का हिसाब अब पुलिस के सामने है। फर्क इतना है कि कहानी में बैलों की व्यथा साहित्य बनी थी, जबकि यहां बकरे की चोट शिकायत का विषय बन गई!

सींग किसने मारे, गवाही कौन देगा?

महिला की शिकायत सुनकर पुलिस ने उन्हें समझाया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद वह अपने घायल बकरे के साथ लौट गईं। हालांकि, मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह स्पष्ट नहीं हो सका। अब सवाल यह है कि बकरों की लड़ाई में चश्मदीद कौन बनेगा और दोनों पक्षों की बात कैसे समझी जाएगी? आखिर बकरे बोलकर अपना पक्ष तो रख नहीं सकते!

गांव में चर्चा, थाने के लिए नया अनुभव

इस अनोखी घटना ने इलाके में चर्चा छेड़ दी है। लोग भी हैरान हैं कि बकरों की भिड़ंत का मामला थाना तक पहुंच गया। व्यंग्य अपनी जगह, लेकिन घटना यह जरूर दिखाती है कि पशुओं को लगी चोट को लेकर भी लोग शिकायत करने थाना पहुंच सकते हैं। अब देखना यह है कि ‘दो बैलों की कथा’ के इस नए, बकरा संस्करण का अगला अध्याय क्या होता है!