सड़क किनारे खड़ी ट्रक ने ली रोशन की जान, जमशेदपुर हादसे के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार?
हंसडीहा-गोड्डा मुख्य मार्ग पर रविवार को दुमका जिला के गंगवारा गांव के समीप एक दर्दनाक सड़क हादसे में 22 वर्षीय रोशन कुमार की मौत हो गई. रोशन स्कूटी से गोड्डा जिला के पोड़ैयाहाट जा रहा था. इसी दौरान सड़क किनारे खराब होने के कारण खड़ी ट्रक के पिछले हिस्से से उसकी स्कूटी टकरा गई.
दुमका (DUMKA): हंसडीहा-गोड्डा मुख्य मार्ग पर रविवार को दुमका जिला के गंगवारा गांव के समीप एक दर्दनाक सड़क हादसे में 22 वर्षीय रोशन कुमार की मौत हो गई. रोशन स्कूटी से गोड्डा जिला के पोड़ैयाहाट जा रहा था. इसी दौरान सड़क किनारे खराब होने के कारण खड़ी ट्रक के पिछले हिस्से से उसकी स्कूटी टकरा गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसके सिर में गंभीर चोट लगी और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई. घर से निकले रोशन की वापसी अब कभी नहीं होगी. जवान बेटे की असमय मौत से परिवार में कोहराम मचा है. मिठाई की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाले पिता भुवनेश्वर मंडल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
जमशेदपुर हादसे की याद ताजा, क्या निर्देशों का जमीन पर हो रहा पालन?
हंसडीहा की इस घटना ने सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों से होने वाले हादसों की रोकथाम पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. जमशेदपुर में भी सड़क पर खड़े ट्रक से कार की टक्कर में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा समेत चार लोगों की मौत हुई थी. उस हादसे के बाद परिवहन मंत्री ने सड़क सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए थे. इसके बावजूद सड़क किनारे खराब होकर खड़े वाहनों के कारण हादसे सामने आना चिंता का विषय है. सवाल यह है कि खराब वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करने के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं या नहीं? क्या ऐसे वाहनों को दूर से ही पहचानने के लिए चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा उपाय लगाए जाते हैं? निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसकी है?
निर्देशों से आगे बढ़कर धरातल पर व्यवस्था की जरूरत
सड़क किनारे खराब होकर खड़ी ट्रक रात के अंधेरे या कम दृश्यता की स्थिति में विशेष रूप से खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे वाहनों के पीछे रिफ्लेक्टिव संकेतक, चेतावनी लाइट और पर्याप्त दूरी पर चेतावनी चिह्न लगाने जैसे सुरक्षा उपाय जरूरी हैं. हंसडीहा की घटना के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग सड़क किनारे खड़े खराब वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हैं या नहीं. सड़क सुरक्षा के निर्देश तभी सार्थक होंगे, जब उनका पालन धरातल पर सुनिश्चित हो और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदारी तय की जाए.
दो साल से निजी क्लीनिक में कर रहा था काम
रोशन पिछले दो वर्षों से गोड्डा स्थित एक निजी क्लीनिक में कंपाउंडर के पद पर काम कर रहा था. दो भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण वह परिवार का लाडला था. उसके पिता भुवनेश्वर मंडल हंसडीहा में मिठाई की दुकान चलाते हैं. बेटे की मौत से परिवार की खुशियां मातम में बदल गई हैं. हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस ने ट्रक और स्कूटी जब्त कर ली. शव को पोस्टमार्टम के लिए फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
रिपोर्ट: पंचम झा