दुमका: सावन का पावन महीना आने में अभी समय है, लेकिन जिला प्रशासन ने श्रावणी मेला की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बाबा बासुकीनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. इसी उद्देश्य से शिवगंगा सरोवर की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु स्वच्छ जल में आस्था की डुबकी लगाकर बाबा बासुकीनाथ पर जलार्पण कर सकें.

शिवगंगा की सफाई के बीच हुए पातालेश्वर महादेव के दर्शन
शिवगंगा की सफाई के दौरान एक बार फिर सरोवर स्थित कुंड में विराजमान पातालेश्वर महादेव के दर्शन होने लगे हैं. जैसे ही इसकी जानकारी श्रद्धालुओं तक पहुंची, दर्शन और पूजन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ के साथ-साथ पातालेश्वर महादेव पर भी जलार्पण कर स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे हैं.
भीड़ नियंत्रण में प्रशासन के छूट रहे पसीने
पातालेश्वर महादेव के दर्शन के लिए बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है. सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने से भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासनिक अमले को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.

भाग्यशाली भक्तों को ही मिलते हैं पाताल बाबा के दर्शन
श्रद्धालुओं का मानना है कि पातालेश्वर महादेव के दर्शन हर किसी को नहीं होते. केवल भाग्यशाली लोगों को ही इस दुर्लभ दर्शन का अवसर प्राप्त होता है। यही कारण है कि दर्शन की खबर फैलते ही दूर-दूर से भक्त बासुकीनाथ पहुंचने लगे हैं.
चार पीढ़ी पुरानी बताई जाती है पाताल बाबा की कथा
पंडित धर्म रक्षिणी सभा के अध्यक्ष मनोज पंडा के अनुसार पातालेश्वर महादेव भी बाबा बासुकीनाथ की तरह स्वयंभू हैं. उन्होंने बताया कि लगभग चार पीढ़ी पहले शिवगंगा सरोवर की सफाई के दौरान पहली बार पाताल बाबा के दर्शन हुए थे. तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

श्रृंगार के बाद भर जाता है जल, फिर भी सुरक्षित रहते हैं पूजन सामग्री
मनोज पंडा बताते हैं कि स्थानीय मान्यता के अनुसार पातालेश्वर महादेव का अंतिम श्रृंगार होने के बाद कुंड पुनः जल से भर जाता है. आश्चर्य की बात यह है कि वर्षों बाद जब दोबारा सफाई होती है, तो महादेव पर अर्पित बिल्व पत्र और गुलाल यथावत अवस्था में दिखाई देते हैं.श्रद्धालु इसे दिव्य चमत्कार के रूप में देखते हैं.

चरण पादुका और त्रिशूल को लेकर भी है विशेष आस्था
कुंड में लकड़ी की चरण पादुका और त्रिशूल भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि वर्षों तक पानी और कीचड़ में डूबे रहने के बावजूद इन पर जंग नहीं लगती और चरण पादुका भी अपने स्थान से नहीं हटती. इन मान्यताओं को लेकर भक्तों में विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है.
व्यवस्था और मजबूत करने की जरूरत
पातालेश्वर महादेव के दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम किए हैं.हालांकि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि सभी भक्त सुगमता और सुरक्षित तरीके से दर्शन-पूजन कर सकें.
आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम
श्रावणी मेला शुरू होने से पहले ही बासुकीनाथ धाम में आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है. पातालेश्वर महादेव के दुर्लभ दर्शन ने श्रद्धालुओं के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया है.
रिपोर्ट पंचम झा

