DUMKA: दुमका में जालसाजी का एक अनोखा मामला सामने आया है. बिहार का एक टोपीबाज दुमका की लोकप्रिय महिला प्रोफेसर को झांसे मे लेता है फिर उन्हें आगे कर उनके रसूख और जान पहचान का फायदा उठाते हुए एक के बाद एक बड़े नामचीन लोगो का नेटवर्क बना कर बकरी पालन योजना के आड़ में ऐसा खेल खेला की सब के सब समझदार लोग आपस में उलझ गए. इस माया जाल का सरगना इन्हें उलझा कर करोड़ों रुपये के साथ फरार हो गया.
समझिए खेल
सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना जरूरतमंद परिवारों को अनुदान पर बकरी बकरा उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का दावा करती है. लेकिन दुमका में इन दिनों सरकारी योजना से ज्यादा चर्चा एक निजी योजना - रीयल वर्ल्ड एसेट्स की हो रही है. सवाल यह है कि आखिर इस योजना ने दुमका में ऐसा क्या किया कि देखते ही देखते करोड़ों रुपये के निवेश की चर्चा होने लगी?
1.37 करोड़ की FIR ने मचाई सनसनी
मामला तब सुर्खियों में आया जब सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. अंजुला मुर्मू ने रीयल वर्ल्ड एसेट्स से जुड़े सात लोगों के खिलाफ 1.37 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई. FIR के बाद कहानी सीधे पुलिस जांच के घेरे में पहुंच गई.
पीड़ित कौन? आरोपी कौन? कहानी यहीं सबसे ज्यादा उलझती है
FIR में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है. लेकिन इस कहानी का सबसे पेचीदा पहलू यह है कि आरोपी बनाई गई सुष्मिता सोरेन भी खुद को पीड़ित बता रही हैं. दूसरी ओर डॉ. अंजुला मुर्मू भी स्वयं को इस पूरे मामले का पीड़ित बता रही हैं. दोनों पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस मामले में असली पीड़ित कौन है?
‘साजिश के तहत फंसाया गया’: डॉ. अंजुला का दावा
FIR दर्ज कराने के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. अंजुला मुर्मू ने दावा किया कि उन्हें सोची समझी साजिश के तहत फंसाया गया है. अगर उनका दावा सही है तो अगला सवाल और गंभीर हो जाता है कि साजिश किसने रची और आखिर उसका फायदा किसे मिला?
कहानी में विनोद सिंह की एंट्री सबसे अहम
डॉ. अंजुला मुर्मू ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है और इनमें विनोद सिंह का नाम सबसे ऊपर है. डॉ. अंजुला ने उन्हें कथित तौर पर पूरे मामले का ‘मास्टरमाइंड’ बताया है. हालांकि, ‘मास्टरमाइंड’ होने का यह दावा फिलहाल आरोप है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
पुरानी पहचान बनी योजना की कड़ी?
बताया जा रहा है कि विनोद सिंह और डॉ. अंजुला मुर्मू की पहचान पुरानी है. ऐसे में एक सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि दुमका में रीयल वर्ल्ड एसेट्स की योजना की शुरुआत आखिर कहां से हुई और सबसे पहले इसकी जानकारी किसे दी गई?
डॉ. अंजुला का दावा: कई लोगों से संपर्क कर रहे थे विनोद
जब इस बारे में डॉ. अंजुला से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि विनोद सिंह ने दुमका में कई लोगों से संपर्क किया था. लेकिन अगर ऐसा था, तो फिर दूसरा सवाल यह है कि निवेशकों को योजना समझाने और भरोसा दिलाने में किसकी क्या भूमिका थी?
सामने आया कथित ऑडियो, बढ़े सवाल
इसी बीच योजना से जुड़े लोगों को कथित तौर पर समझाते हुए डॉ. अंजुला मुर्मू का एक वायरल ऑडियो क्लिप The News Post के पास पहुंचा है. हालांकि, The News Post इस ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता. ऑडियो में आवाज वास्तव में किसकी है और रिकॉर्डिंग का संदर्भ क्या है, यह जांच का विषय है.
यूके की कंपनी, कनाडा का शख्स, हरियाणा से बिहार से होते हुए दुमका का कनेक्शन
कथित ऑडियो में डॉ. अंजुला मुर्मू रीयल वर्ल्ड एसेट्स के बारे में विस्तार से जानकारी देती सुनाई देती हैं. इसमें कनाडा निवासी श्याम स्टेगल द्वारा यूके में कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराने और उन्हें कंपनी का CEO बताए जाने की बात सामने आती है.
तीन फाउंडर बताए गए - श्याम स्टेगल, डॉ. केहर और विनोद सिंह
ऑडियो के कथित अंश में आगे बताया जाता है कि श्याम स्टेगल की हरियाणा निवासी डॉ. केहर से दोस्ती हुई और बाद में श्याम स्टेगल, डॉ. केहर तथा विनोद सिंह को रीयल वर्ल्ड एसेट्स का फाउंडर बताया गया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है.
करीब एक घंटे का ऑडियो, योजना का पूरा मॉडल समझाने का दावा
बताया जा रहा है कि लगभग एक घंटे के इस ऑडियो में डॉ. अंजुला मुर्मू योजना से जुड़े लोगों को इसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी देती हैं. यदि ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होती है, तो यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि योजना को लोगों तक पहुंचाने और निवेश के लिए तैयार करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका क्या थी?
साजिश, निवेश और कथित धोखाधड़ी —तीनों के बीच क्या है कनेक्शन?
एक तरफ 1.37 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की FIR है. दूसरी तरफ साजिश में फंसाए जाने का दावा. FIR में आरोपी बनाई गई महिला खुद को पीड़ित बता रही है और दूसरी ओर निवेश से जुड़ी बातचीत का कथित ऑडियो सामने आ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल: पैसा गया कहां?
अब इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि किसने कितना पैसा लगाया, पैसा किसके खाते में गया, कंपनी का वास्तविक कारोबार क्या था और निवेशकों को वास्तव में क्या लाभ मिला? इन सवालों के जवाब ही इस पूरी कहानी की दिशा तय करेंगे.
‘रीयल’ नाम कितना रीयल? जांच में खुलेगा राज
नाम भले ही Real World Assets हो, लेकिन अब जांच का विषय यह है कि कंपनी का वास्तविक कानूनी अस्तित्व, उसका कारोबार, निवेश मॉडल और दुमका में उसकी गतिविधियां क्या थीं. अगर सब कुछ वैध था तो निवेशकों के पैसे और लेन देन का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए. और अगर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
अब असली परीक्षा जांच एजेंसी की
फिलहाल किसी पक्ष को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. लेकिन इतना जरूर है कि दुमका में बकरी पालन के नाम पर चल रही इस पूरी कहानी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आखिर कौन मास्टरमाइंड है? कौन पीड़ित है? किसने किसे योजना समझाई? निवेश का पैसा कहां गया? और अगर साजिश हुई, तो उसका फायदा किसे मिला? इन सवालों के जवाब अब जांच से ही सामने आएंगे.
रिपोर्ट: पंचम झा
सुनिए वायरल ऑडियो का वह अंश, जिसने पूरे मामले को और रहस्यमय बना दिया...