दुमका: बीमारी का इलाज चिकित्सा विज्ञान से नहीं, अंधविश्वास से खोजा; ‘डायन’ बताकर  वृद्धा की हत्या

एक तरफ हम चांद पर नई दुनिया बसाने की बात करते है वहीं दूसरी तरफ आज भी अंधविश्वास की जड़ें इतनी मजबूत है कि डायन के शक में किसी की हत्या करने से बाज नहीं आते. विज्ञान के इस दौर में भी अंधविश्वास ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया

दुमका: बीमारी का इलाज चिकित्सा विज्ञान से नहीं, अंधविश्वास से खोजा; ‘डायन’ बताकर  वृद्धा की हत्या

दुमका: एक तरफ हम चांद पर नई दुनिया बसाने की बात करते है वहीं दूसरी तरफ आज भी अंधविश्वास की जड़ें इतनी मजबूत है कि डायन के शक में किसी की हत्या करने से बाज नहीं आते. विज्ञान के इस दौर में भी अंधविश्वास ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया. मामला दुमका जिला के  तालझारी थाना क्षेत्र के नेमानी पाथर गांव की है.  कुछ दिन पूर्व बीमारी से हुई एक व्यक्ति की मौत का कारण तलाशने के बजाय 85 वर्षीय ढेंगी मुर्मू को ‘डायन’ करार दे दिया गया. इसके बाद कथित तौर पर छह महिलाओं और एक किशोरी ने उसके घर में घुसकर लाठी डंडों से हमला कर दिया. बेरहमी से की गई पिटाई में वृद्धा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसे बचाने पहुंची बेटी सुरजमनी हांसदा घायल हो गई.

विज्ञान कहता है बीमारी के पीछे कारण होते हैं, अंधविश्वास ने इंसान को बना दिया दोषी

गांव में करीब तीन दिन पहले एक व्यक्ति की बीमारी से मौत हुई थी. परिवार के दो अन्य सदस्य भी बीमार थे. बीमारी का चिकित्सकीय कारण जानने और इलाज कराने के बजाय किसी ने कथित तौर पर यह बात फैला दी कि ढेंगी मुर्मू डायन है और उसी के कारण मौत हुई है. अफवाह ने देखते ही देखते अंधविश्वास का रूप ले लिया और एक बुजुर्ग महिला की जिंदगी खतरे में पड़ गई.

‘डायन’ का ठप्पा लगा, फिर घर में घुसकर हमला

आरोप है कि शुक्रवार रात मकोदी हांसदा, रनिया हांसदा, छितामुनि हांसदा, शांति मुर्मू, फूलमनी सोरेन, लोगाई हांसदा और परिवार की एक किशोरी लाठी डंडे लेकर ढेंगी मुर्मू के घर में घुस गईं. इसके बाद वृद्धा पर हमला कर दिया गया.

मां को बचाने दौड़ी बेटी, हमलावरों ने उसे भी पीटा

वृद्धा को बचाने के लिए उसकी बेटी सुरजमनी हांसदा सामने आई, लेकिन आरोप है कि हमलावरों ने उसे भी लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया. हमले में ढेंगी मुर्मू को गंभीर चोटें आईं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

एक मौत के बाद दूसरी मौत—फर्क सिर्फ इतना कि पहली बीमारी से, दूसरी अंधविश्वास से

गांव में जिस व्यक्ति की बीमारी से मौत हुई, उसकी मौत का कारण चिकित्सा जांच से पता लगाया जा सकता था. लेकिन अफवाह के आधार पर एक 85 वर्षीय महिला को जिम्मेदार मान लिया गया. नतीजा यह हुआ कि बीमारी से हुई मौत के बाद अंधविश्वास ने एक और जान ले ली.

पुलिस पहुंची, तब तक बुझ चुकी थी बुजुर्ग की जिंदगी

घटना की सूचना मिलने के बाद तालझारी थाना पुलिस रात में गांव पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और घायल बेटी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया. प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया.

6 गिरफ्तार, एक किशोरी को किया गया निरुद्ध, लाठी-डंडे बरामद

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए छह महिलाओं को गिरफ्तार किया जबकि एक किशोरी को निरुद्ध  किया है. पुलिस के अनुसार घटना में इस्तेमाल लाठी-डंडे भी बरामद कर लिए गए हैं. समाचार प्रेषित किए जाने तक आरोपी को जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है.  

कानून ने कार्रवाई की, अब समाज को भी सोचना होगा

थाना प्रभारी संगम पाठक के अनुसार मां-बेटी पर डायन के शक में हमला किया गया था, जिसमें मां की मौत हो गई. मामले में डायन हत्या का केस दर्ज कर सभी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

सवाल सिर्फ हत्या का नहीं, सोच का भी है

बीमारी का कारण वायरस हो सकता है, बैक्टीरिया हो सकता है, संक्रमण या कोई अन्य चिकित्सकीय वजह हो सकती है. उसका पता डॉक्टर, जांच और विज्ञान से चलता है, किसी व्यक्ति को ‘डायन’ घोषित करने से नहीं. लेकिन नेमानी पाथर की घटना ने दिखा दिया कि अंधविश्वास आज भी किस तरह किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है.

अंधविश्वास के आगे विज्ञान हारा तो फिर किसकी कीमत चुकानी पड़ेगी?

85 साल की ढेंगी मुर्मू अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके खिलाफ ‘डायन’ होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं था, फिर भी एक अफवाह ने उन्हें मौत के मुंह में पहुंचा दिया. यह घटना सिर्फ एक वृद्धा की हत्या नहीं, बल्कि उस सोच पर सवाल है जो बीमारी का कारण विज्ञान में तलाशने के बजाय इंसान में तलाशती है.

रिपोर्ट: पंचम झा