वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की समय पूर्व नहीं होगी रिहाई,अनिल शर्मा,सुरेंद्र बंगाली भी रहेंगे जेल में,जानिए बोर्ड ने क्या लिया है फैसला?

वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की समय से पूर्व रिहाई नहीं होगी. इसके साथ ही गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली की भी रिहाई संभव नहीं होगी

वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की समय पूर्व नहीं होगी रिहाई,अनिल शर्मा,सुरेंद्र बंगाली भी रहेंगे जेल में,जानिए बोर्ड ने क्या लिया है फैसला?

धनबाद: वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान की  समय से पूर्व रिहाई नहीं होगी. इसके साथ ही गैंगस्टर अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली की भी रिहाई संभव नहीं होगी.झारखंड के कुल 53 बंदियों के बारे में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की जुलाई महीने में हुई बैठक में लिए गए निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है.

फहीम खान के मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. झारखंड सरकार ने जुलाई महीने में हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना में बताया गया है कि क्यों सभी प्रस्तावों को अस्वीकृत किया गया.

 फहीम खान के मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में उसकी रिहाई पर विचार किया गया था. बोर्ड ने पाया कि फहीम खान गैंगस्टर है, जिसका उसके इलाके में प्रभाव है .वह कई गंभीर अपराधों  में संलिप्त रहा है. बोर्ड का मानना है कि फहीम खान के रिहाई से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसे देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 20 जुलाई 2026 के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है. 

जानकारी के अनुसार झारखंड सरकार ने जेल में बंद कुख्यात अपराधियों और गंभीर मामलों  के बंदियों के मामले में 30 जुलाई को विचार किया था. अब जाकर  अधिसूचना जारी की गई है और प्रस्ताव को क्यों अस्वीकृत किया गया है, इसका कारण बताया गया है. 

सूचना के मुताबिक गैंगस्टर फहीम खान, अनिल शर्मा सुरेंद्र बंगाली समेत 53 बंदियों  की समय पूर्व रिहाई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है. फहीम खान फिलहाल जमशेदपुर के घाघीडीह  केंद्रीय कारा में बंद है. सूचना के मुताबिक हजारीबाग जेल में बंद अनिल शर्मा की समय पूर्व रिहाई के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया गया है. खुफिया और पुलिस रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई थी कि उसके जेल से बाहर आने पर क्षेत्र में गैंगवार  भड़क सकता है. 

हजारीबाग जेल में ही बंद सुरेंद्र बंगाली के मामले में भी समय पूर्व रिहाई के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है. कहा गया है कि इन लोगों की समय पूर्व रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा. सूत्रों के अनुसार दोबारा अपराध की आशंका का हवाला देते हुए झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद ने यह निर्णय लिया है.