वासेपुर गैंगवार : ठेकेदार जफर आलम की हत्या से फहीम -साबिर का टूटा भरोसा ! जानिए मां और मौसी की हत्या ने कैसे भड़काई थी ज्वाला
वासेपुर के गैंगवार की नई -पुरानी कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है. शनिवार को ही साबिर आलम के भाई सहित तीन लोगों को उम्र कैद की सजा कोर्ट ने सुनाई है.
धनबाद : वासेपुर के गैंगवार की नई -पुरानी कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है. शनिवार को ही साबिर आलम के भाई सहित तीन लोगों को उम्र कैद की सजा कोर्ट ने सुनाई है. इसके बाद से गैंगस्टर फहीम खान और साबिर आलम के बीच के रिश्ते को लेकर चर्चाएं तेज हैं. फहीम खान फिलहाल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, तो साबिर आलम फरार है. दरअसल, एक समय ऐसा था, जब फहीम खान और साबिर आलम में दांत काटी रोटी की दोस्ती थी. लेकिन यह दोस्ती अचानक दुश्मनी में बदल गई और दुश्मनी में ऐसी बदली कि दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे बन गए.
ठेकेदार जफर आलम के मर्डर के बाद दोस्ती में आई थी दरार
सूत्रों के अनुसार ठेकेदार जफर आलम के मर्डर के बाद दोनों की दोस्ती में ऐसी दरार पड़ी, जो खानदानी दुश्मनी में बदल गई. इसके बाद तो बदला लेने का सिलसिला शुरू हुआ. यह सिलसिला झारखंड की राजधानी रांची तक को अपनी चपेट में ले लिया था. ठेकेदार की हत्या ने दोनों के बीच गहरी खाई खोद दी. 63 का रिश्ता 36 में बदल गया. फहीम खान की मां और मौसी की डायमंड क्रॉसिंग के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसके बाद आपसी दुश्मनी और बढ़ गई. कहते हैं कि इसके बाद साबिर आलम के भाई की हत्या रांची में करा दी गई. फिर फहीम खान के घर पर एके -47 से हमला कराया गया. लंबी चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने शनिवार को साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को उम्र कैद की सजा सुनाई है. 2001 में फहीम की मां और मौसी की हत्या हुई थी.
2009 में रांची के हटिया में गोलियां बरसी थी ,साबिर का भाई मारा गया था
उसके बाद 2009 में रांची के हटिया रेलवे स्टेशन के पास साबिर आलम के भाई वाहिद आलम की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड को भी वासेपुर के गैंगवार से जोड़कर देखा गया. 29 जनवरी 2004 को फहीम खान के घर पर एके -47 से हमला किया गया. फहीम खान ने पड़ोसी की छत पर कूद कर जान बचाई थी. लेकिन फहीम खान का बॉडीगार्ड विनोद शर्मा गोलियों से भून दिया गया था. साबिर आलम फिलहाल फरार चल रहा है. जानकारी के अनुसार 2013 से ही वह फरार चल रहा है. . हालांकि धनबाद पुलिस को मिली सटीक सूचना पर उसे पकड़ने के लिए इसी साल जुलाई महीने में पुलिस छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर इलाके में घेराबंदी की थी. लेकिन वह हाथ से फिसल गया. साबिर यहां अपना वास्तविक पहचान छिपाकर रह रहा था. लोग बताते हैं कि वह अपने किसी संबंधी के साथ ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय भी कर रहा था.