पुरुलिया के बहुचर्चित करम महोत्सव में नहीं रहते हुए भी मौजूद थे जयराम महतो? क्या पक रही राजनीतिक खिचड़ी, पढ़िए 

पुरुलिया के करम महोत्सव में कुड़मी समाज की मांगों के बीच जयराम महतो और शुभेंदु अधिकारी के बीच बयानबाजी चर्चा में रही.

पुरुलिया के बहुचर्चित करम महोत्सव में नहीं रहते हुए भी मौजूद थे जयराम महतो? क्या पक रही राजनीतिक खिचड़ी, पढ़िए

धनबाद (DHANBAD): बंगाल के पुरुलिया में 20 सितंबर को हुए करम महोत्सव की, कम से कम तीन राज्यों में खूब चर्चा है. राजनीतिक ताना-बाना बनने-बिगड़ने की भी बात कही जा रही है. झारखंड तो इसे सीधे जुड़ा हुआ है. बंगाल में तो कार्यक्रम ही हुआ है. ओडिशा के लोगों की भी मौजूदगी रही. इस कार्यक्रम की एक खास विशेषता, जो देखने को मिली कि झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो कार्यक्रम में नहीं होने के बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित रहे? बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कुड़मी नेता अजीत महतो के हवाले से जयराम महतो पर तीखा तंज कसा. हालांकि उन्होंने जयराम महतो का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि झारखंड के एक विधायक हैं, जो कह रहे हैं कि पूरा आयोजन भाजपा के फंडिंग से हुआ है. यह सीएम का जयराम महतो पर तंज था. उन्होंने लोगों से पूछा-क्या यह सब सच है? इस बात पर लोगों से उन्होंने हाथ भी उठवाया. इस कार्यक्रम में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, पुरुलिया के सांसद, बंगाल के मुख्यमंत्री, कुड़मी समाज के नेता अजीत महतो सहित अन्य लोग मौजूद थे.  

अपने खिलाफ टिप्पणी पर विधायक जयराम महतो कहां चुप रहने वाले ?

बंगाल के मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर जयराम महतो कहां चुप रहने वाले थे. उन्होंने भी तीखा तंज कसा है. उन्होंने एक ट्वीट किया है. ट्वीट में कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी, आपको जोहर! अगर कोई विधायक या सांसद टीका टिप्पणी करता, तो मैं इग्नोर कर देता, लेकिन आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए इस क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर मिलेगी. वह भी तर्कों के साथ, थोड़ा इंतजार कीजिये. यह कार्यक्रम मूल रूप से कुड़मी समाज का सामाजिक महासमागम था. जिसमें करम पर्व केंद्र बनाया गया था. कार्यक्रम में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा  से बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग पहुंचे थे. आयोजक बताते हैं 40 हजार नृत्य दलों ने भाग लिया था, लेकिन कार्यक्रम केवल पूजा-सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं था, इसके साथ समाज की लंबे समय से चली आ रही कुछ प्रमुख मांगे भी जुड़ी थी. 

अजीत प्रसाद महतो के हवाले से बंगाल के सीएम ने की थी टिप्पणी 
 
इसमें मुख्य कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा, कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, सरना धर्म के लिए अलग धार्मिक कोड बनाना और कुड़मी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा और खत्म करना था. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने भरे मंच से अजीत प्रसाद महतो के हवाले से कहा कि झारखंड के एक नए उभरते नेता का कहना है कि यह सब भाजपा के पैसों से हो रहा है, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि पिछली मुख्यमंत्री इस समाज से दिल से नहीं जुडी थी और उलटे समाज के लोगों पर झूठे केस करवा दिया गया. लेकिन मैं कुर्मी समाज को दिल से मानता हूं और उनकी जो भी समस्या है और उनकी जो मांगे हैं, इन सभी मांगों को पूरा करवाने में पूरा सहयोग करूंगा.

अजीत प्रसाद महतो सामाजिक आंदोलन के नेता के रूप में जाने जाते हैं 

बताया जाता है कि अजीत प्रसाद महतो किसी विशेष पार्टी की राजनीति नहीं करते हैं, बल्कि वह कुड़मी समाज के सामाजिक आंदोलन नेता के रूप में जाने जाते हैं. वह पुरुलिया केंद्रित आदिवासी कुर्मी समाज के प्रमुख नेता में एक है. संगठन में उन्हें मूल स्तंभ या मूल खूंटी भी कहा जाता है. वह पुरुलिया शहर के भावतरण क्षेत्र से आते है.  लोग बताते हैं 2015 तक अजीत प्रसाद महतो किसी विशेष से राजनीतिक दल में काम किया, लेकिन 15 के बाद वह राजनीति से हटकर कुड़मी  सामाजिक संगठन के साथ काम करना शुरू किया. 2016 में सोरडीहा और कुस्तौर स्टेशनों पर रेल ठेका आंदोलन में भी इनका योगदान रहा.

डुमरी विधायक जयराम महतो ने बंगाल के सीएम को क्या कहा है ?

जैसे ही डुमरी विधायक जयराम महतो को मालूम हुआ कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने उनके बारे में टीका टिप्पणी की है, तो वह भी कहां चुप रहने वाले थे. सोमवार को करम महोत्सव में बलियापुर पहुंचे और कहा कि झारखंड से 200 से ढाई सौ किलोमीटर दूर भी मेरे चर्चे हैं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस छोटी सी उम्र में मैंने क्या कमाया है? निसंदेह उनको तार्किक जवाब दिया जाएगा, अभी उनके बारे में रिसर्च जारी है. वह भी किसी टाइम नेता रहे होंगे लेकिन उन्होंने समाज के लिए क्या किया, वह समाज तय करेगा. साथ ही अजीत प्रसाद महतो पर भी निशाना साधते हुए कहा  कि वह सारे लोग आरटीआई करें, पता चल जाएगा कि किसने समाज के लिए क्या कार्य किया है? 

रिपोर्ट -प्रकाश महतो