वासेपुर गैंगवार की कहानी: कभी फहीम-साबिर में था दांत काटी रोटी का रिश्ता, आज एक जेल में तो दूसरा फरारी में

समय के अनुसार वासेपुर में गैंगवार का स्वरूप बदलता रहा है. कभी गैंगस्टर फहीम खान के पिता के जमाने में नया बाजार से गैंगवार चलता था.

वासेपुर गैंगवार की कहानी: कभी फहीम-साबिर में था दांत काटी रोटी का रिश्ता, आज एक जेल में तो दूसरा फरारी में

धनबाद(DHANBAD) | समय के अनुसार वासेपुर में गैंगवार  का स्वरूप बदलता रहा है.  कभी गैंगस्टर फहीम खान के पिता के जमाने में नया बाजार से गैंगवार  चलता था.  इसगैंगवार  में भी फहीम खान के पिता सहित नया बाजार के कई लोगों की हत्याएं हो चुकी है. फहीम के भाई शमीम की भी हत्या  .हुई थी.  उसके बाद गैंगवार  रुकने के बजाय फिर एक बार नए लोगों के बीच शुरू हो गया था. लोग बताते हैं कि "गैंग्स ऑफ़ वासेपुर" फिल्म की कहानी और जमीनी हकीकत अलग-अलग है.  जमीनी हकीकत कुछ अधिक डरावनी लगती है. 

एक समय फहीम और साबिर ने मिलकर किया था यूथ क्लब का गठन 
 
एक समय फहीम खान और  साबिर आलम में दांत काटी रोटी की दोस्ती थी.  जानकार बताते हैं कि 2001- 2002 का समय रहा होगा।  दोनों ने मिलकर यूथ क्लब का गठन किया था.  उसके बाद एक व्यक्ति की हत्या हुई और इसी हत्या ने दोनों को एक दूसरे के  जान  का दुश्मन बना दिया।  दुश्मनी और अधिक बढ़ गई ,जब  फहीम खान की मां और मौसी की  डायमंड क्रॉसिंग के पास दिनदहाड़े हत्या कर दी गई.  इस दोहरे हत्याकांड में साबिर आलम को  सजा हुई.  उसके बाद वह फरार चल रहा है.  वह छत्तीसगढ़ में अपनी पहचान बदलकर ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय कर रहा था.  उसकी खोज में धनबाद पुलिस इसी साल जुलाई महीने में छत्तीसगढ़ पहुंची थी.  लेकिन भनक लगने के बाद साबिर आलम फरार हो गया. 

साबिर आलम के छत्तीसगढ़ में होने की सूचना पर पहुंची थी धनबाद पुलिस 
 
सूत्र बताते हैं कि वहां अपने किसी संबंधी के साथ मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार कर रहा था.  वहां के लोगों को साबिर आलम की असलियत  तब पता चला, जब धनबाद पुलिस उसे ढूंढने छत्तीसगढ़ पहुंची थी.  फिलहाल 2004 में फहीम खान के घर पर एके -47 से हमला कांड में साबिर आलम के एक भाई और दो अन्य लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है.  सजा के बिंदु पर 3 अक्टूबर को सुनवाई होगी।  वासेपुर ने गैंगवार के कई रूप और स्वरूप को देखा है. अभी भी गैंगवार की आहट सुनाई देती है. 29 जनवरी 2004 की वह सर्द रात, जिसे कम से कम गैंगस्टर फहीम खान का परिवार कभी भूल नहीं सकता है. भूलेगा भी कैसे, उस रात धनबाद में एक साथ कई एके -47 से गोलियां बरसी थी. 

फहीम खान को भागकर जान बचाना पड़ा था ,बॉडी गार्ड मारा गया था 

फहीम खान के घर पर बड़ा हमला हुआ था. फहीम खान भाग कर जान बचाई थी. उस समय वासेपुर में फहीम खान और साबिर आलम के बीच गैंगवार चल रहा था. इस हमला कांड में फहीम खान के उस समय के दुश्मन साबिर आलम सहित उसके दो भाई,पिता सहित अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ था. साबिर आलम फरार है. उसका एक भाई वाहिद आलम की रांची के हटिया थाना क्षेत्र में 2009 में हत्या कर दी गई थी. एक भाई शाहिद आलम को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. दूसरी ओर फिलहाल फहीम खान भी जमशेदपुर के घाघीडीह जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है .

29 जनवरी 2004 हमला कांड पुलिस के लिए भी बनी थी चुनौती 

फहीम खान के घर पर 2004 में हुए हमले को चर्चित फिल्म" गैंग्स ऑफ़ वासेपुर" पार्ट 2 में भी फिल्माया गया है.किरदार अलग अलग नाम के हैं. 29 जनवरी 2004 की रात धनबाद पुलिस के लिए भी चुनौती लेकर आई थी. फहीम खान के घर पर हमले की सूचना पर पहुंची पुलिस भाग रहे अपराधियों की पीछा किया था. धनबाद के पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास अपराधियों और पुलिस में मुठभेड़ हो गई थी. बताते हैं कि इस मुठभेड़ में बिहार के एक शूटर की मौत हो गई थी.कई पकड़े गए थे. लंबे समय तक उस एनकाउंटर की चर्चा होती रही. इधर ,सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे फहीम खान के दुश्मन साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर निवासी शहादत हुसैन और पटना के शूटर तनवीर आलम को दोषी करार दिया है. सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तिथि तय की गई है.