The News Post Impact: कतरास के कतरी नदी से आखिरकार हटा पुल, जिसने बनाया उसने ही क्यों हटाया ,पढ़िए 

कतरास के कतरी नदी पर बनाया गया अस्थाई पुल को ध्वस्त कर दिया गया हैं. खासियत यह है कि जिसने बनाया, उसी को हटाना पड़ा है.

The News Post Impact: कतरास के कतरी नदी से आखिरकार हटा पुल, जिसने बनाया उसने ही क्यों हटाया ,पढ़िए

धनबाद(DHANBAD): कतरास के कतरी नदी पर बनाया गया अस्थाई पुल को ध्वस्त कर दिया गया है.  खासियत यह है कि जिसने बनाया, उसी को हटाना पड़ा  है.  कतरी नदी के प्राकृतिक धारा को मोड़कर रास्ता बनाया गया था.  जिसका विरोध हो रहा था.  केवल विरोध ही नहीं हो रहा था, बीसीसीएल के कई बड़े अधिकारियों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ है.  मुकदमा दर्ज होने के बाद अस्थाई पुल को हटा लिया गया है.  बाघमारा सीओ  के आवेदन पर बीसीसीएल के अधिकारियों पर कतरास थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ है. बता दें कि The Newspost  ने रविवार को कई सवाल खड़े किये थे. 

यह मामला कतरास से लेकर बीसीसीएल मुख्यालय तक चर्चा में था. आउट सोर्स कंपनी निशाने पर थी. सवाल किये जा रहे थे कि क्या  बीसीसीएल में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियों की क्या अब समानांतर व्यवस्था चल रही है? किसकी सह पर  एनआईटी के शर्तों का खुल्लम-खुल्ला डंके की चोट पर उल्लंघन किया जा रहा है.   बीसीसीएल मैनेजमेंट भी सवालों के घेरे में था  तो आर के माइनिंग आउटसोर्सिंग पर तो सीधे-सीधे नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था. . मामला  पुलिस के पास पहुंच गया . आज से लगभग 30 साल पहले कतरी नदी की विभीषिका को धनबाद में देखा है. कतरी नदी जब उफान पर आई तो 60 से अधिक कोयला श्रमिकों की जल समाधि हो गई थी. उसके बाद से कतरी  नदी के बहाव  से छेड़छाड़ करने की कोई सोच भी नहीं रहा था. लेकिन 2026 में एक बार फिर यह मामला सामने आया है.

 वैसे भी कतरी नदी के अगल-बगल कोयले के अवैध उत्खनन की वजह से कतरी नदी अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं रह गई है. लेकिन जो भी उसका प्राकृतिक बहाव है, उससे छेड़छाड़ करने का बड़ा मामला सामने आया था.  कतरी नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ कर कच्चा पुल बनाने के मामले को लेकर शनिवार को कतरास थाने में प्राथमिक की दर्ज की गई थी. इस मामले में आर के कोल माइनिंग के प्रोजेक्ट हेड, मैनेजर और सुपरवाइजर के अलावा बीसीसीएल-4 के महाप्रबंधक सहित अन्य पर आरोपी बनाया गया था . आरोप था  कि आउट सोर्स कंपनी ने बगैर अनुमति के कतरी नदी में पाइप डालकर कच्चा पुल तैयार किया है. . इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है.