कतरास बचाने का आंदोलन पंहुचा धनबाद, उठे सवाल-अवैध उत्खनन करने वालों की पीठ पर किसका हाथ ?

कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा का आंदोलन अब फैलता जा रहा है. कतरास में जमीन के नीचे आग है, तो ऊपर आंदोलन की ज्वाला बढ़ रही है. अवैध उत्खनन से जमीन फट रही है, धंस रही है. कई तालाब जमीन में समा गए हैं.

कतरास बचाने का आंदोलन पंहुचा धनबाद, उठे सवाल-अवैध उत्खनन करने वालों की पीठ पर किसका हाथ ?

धनबाद (DHANBAD): कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा का आंदोलन अब फैलता जा रहा है. कतरास में जमीन के नीचे आग है, तो ऊपर आंदोलन की ज्वाला बढ़ रही है. अवैध उत्खनन से जमीन फट रही है, धंस रही है. कई तालाब जमीन में समा गए हैं. लोग बेघर हो गए हैं, संपत्ति का नुकसान हुआ है. इधर, बीसीसीएल की ई-प्रोजेक्ट भी लोगों के सामने है. ऐसे में आंदोलन अब कतरास बचाने को लेकर शुरू हो गया है. 

पांच लाख लोगो के लिए जीवन-मरण का सवाल है
 
दावा किया गया है कि पांच लाख लोगो के लिए जीवन-मरण का सवाल है. कतरास में भू-धसान और अवैध उत्खनन के मुद्दे को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होता दिख रहा है. गुरुवार को कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन किया. इस दौरान लोगों ने कतरास की सुरक्षा, विस्थापन और अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की. मोर्चा के संयोजक मंडली सदस्य राजीव रंजन उर्फ चुन्ना यादव ने बीसीसीएल पर कतरास के लोगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीसीसीएल के मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर कतरास के लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है.

कतरास के लोगो की सुरक्षा किसकी जिम्मेवारी ?

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा और उनके भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. राजीव रंजन ने आरोप लगाया कि कतरास में लगातार भू-धंसान और अवैध उत्खनन की घटनाएं सामने आ रही हैं. बावजूद बीसीसीएल, सीआईएसएफ, डीजीएमएस और जिला प्रशासन की ओर से लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि कतरास के लोगों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा और उनके हक की लड़ाई जारी रहेगी. राजीव रंजन ने कहा कि अगर स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली तक ले जाया जाएगा और केंद्र सरकार के सामने भी कतरास के लोगों की समस्याएं रखी जाएंगी.