25 सितंबर "1995 की काली रात को याद कर आज भी क्यों "रोता" है धनबाद,पढ़िए
25 सितंबर "1995 की काली रात को कोयलांचल कभी भूल नहीं सकता है. आज भी नहीं भूला है और भविष्य में कभी भी नहीं भूलेगा
25 सितंबर "1995 की काली रात को कोयलांचल कभी भूल नहीं सकता है. आज भी नहीं भूला है और भविष्य में कभी भी नहीं भूलेगा
धनबाद(DHANBAD) : 25 सितंबर "1995 की काली रात को कोयलांचल कभी भूल नहीं सकता है. आज भी नहीं भूला है और भविष्य में कभी भी नहीं भूलेगा. भारी बारिश के वजह से कतरास की कतरी नदी का बांध टूटा और पानी खदान में प्रवेश कर गया था. पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। इस वजह से 64 श्रमिक की जल समाधि हो गई थी. कतरास की कतरी नदी कतरास - बाघमारा के लिए जीवनदायिनी कही जाती है. लेकिन उस रात ऐसा भयंकर रूप लिया कि सुरक्षा की तमाम व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई थी. आज 25 सितंबर 2026 है. तीन दिनों से कोयलांचल में लगातार बारिश हो रही है. बारिश से खदानों पर संकट पैदा हो गया है. यह अलग बात है कि आज भी कतरी नदी के भाव एरिया से छेड़छाड़ किया जाता है. कुछ महीना पहले विवाद भी हुआ था.
25 सितंबर 1995 को क्यों दहल गया था कोयलांचल
अभी बारिश से भारी तबाही मची हुई हैं. आज तीसरे दिन लगातार बारिश से कोयलांचल बेदम हो गया है. जनजीवन प्रभावित है. पशु -पक्षियों को ठिकाना नहीं मिल रहा है. वैसे सितंबर महीने की बारिश से कोयलांचल के रोंगटे खड़े हो जाते है. 25 सितंबर 1995 कि वह काली रात, जब कतरी नदी के पानी से 64 श्रमिकों की जल समाधि हो गई थी. इस घटना ने बीसीसीएल समेत कोयलांचल को दहला दिया था. कतरी नदी की धारा मुड़ी और पानी गजलीटांड़ खदान में प्रवेश कर गया. नतीजा हुआ कि खदान में मौजूद श्रमिकों की जल समाधि हो गई. 25 सितंबर 1995 को कोयलांचल में रिकॉर्ड बारिश दर्ज हुई थी. कतरास में खदान के नजदीक बहने वाली कतरी नदी विकराल रूप ले चुकी थी.
नदी का सुरक्षा घेरा टूटा और हो गया बड़ा हादसा
पानी के भारी दबाव के कारण नदी का सुरक्षा घेरा टूट गया था. नदी बेकाबू हो गई और पानी सीधे गाजलीटांड़ खदान में प्रवेश कर गया था. जानकार बताते हैं कि नदी का पानी जब खदान में घुसा, उस समय 6 नंबर चानक में दूसरी पाली में 64 मजदूर काम कर रहे थे. उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला, पूरी खदान पानी से भर गई. चीख पुकार के बीच मजदूरों की जल समाधि हो गई थी. इस घटना ने बीसीसीएल के समूचे ढांचे को हिला कर रख दिया था. कोयला मंत्रालय से लेकर बिहार सरकार तक हिल गई थी. इस घटना ने इतना प्रभाव डाला की बीसीसीएल बीआईएफआर में चली गई. बहुत दिनों तक बी आईएफआर में रहने के बाद बीसीसीएल बाहर निकली है. उस समय बीसीसीएल के सीएमडी जीसी मृग थे. बाघमारा के गाजलीटांड़ ग्राउंड में श्रमिकों की याद में समाधि स्थल बनाया गया. लोग यह भी बताते है कि कुछ कोयला मजदूरों की लाशें भी नहीं निकाली जा सकी थी.