पूछ रही धनबाद की सिंदरी- बरौनी, गोरखपुर और तालचर पर केंद्र की "कृपा" तो पंडित नेहरू की "ड्रीम सिंदरी पर क्यों नहीं?
सिंदरी के मनोहरटांड़ और SL-2 कॉलोनी के करीब 1000 क्वार्टरों को ध्वस्त करने के फैसले पर मजदूर संगठनों और स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग की है. नेताओं ने इसे सिंदरी और झारखंड के हितों के खिलाफ बताया है.
धनबाद (DHANBAD): देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की "ड्रीम सिंदरी" पर केंद्र सरकार का नजरिया सही नहीं है. यह आरोप सिंदरी के लोगों का है, मजदूर संगठन के नेताओं का है. भाजपा सरकार ने बरौनी, गोरखपुर, सिंदरी और तालचर के फर्टिलाइजर कारखाने को एक साथ बंद करने का निर्णय लिया था. जनता के दबाव पर बरौनी, गोरखपुर और तालचर के कारखाने को फिर से खोल दिया गया. यह सभी कारखाने वर्तमान में कोल्गै सीफिकेशन पर आधारित कारखाने हैं.
राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर यूनियन के महामंत्री ए.के. झा ने कहा है कि एनटीपीसी, एफसीआई, एएफसी, इंडियन ऑयल तथा कोल इंडिया लिमिटेड के ज्वाइंट वेंचर में हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (हर्ल), सिंदरी के नाम से चालू किया गया है. लेकिन बरौनी, गोरखपुर, तालचर की फर्टिलाइजर कंपनी, कोल गैसीफिकेशन पर आधारित कारखाना है. हर्ल को उससे वंचित रखने के पीछे कहीं से भी राष्ट्रीय हित दिखाई नहीं देता है. आगे उन्होंने कहा कि सिंदरी के मकान की क्वालिटी बहुत ही अच्छी है, जिसका जीता जागता सबूत हर्ल कंपनी की एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग है, जो लगभग 74 वर्ष पुरानी है.
मनोहरटांड और SL-2 को खाली करने के पीछे भाजपा सरकार की मंशा चंद पूंजीपतियों को मदद करने की है. एफसीआई, सिंदरी, कॉलोनी में रह रहे लोगों का जो रेंट निर्धारित किया जा रहा है, यह रेट कहीं से भी न्यायोचित नहीं है. सिंदरी के लोगों में मानसिक आतंक पैदा कर पूंजी पतियों के निजी हित के लिए आवास खाली कराने की एक राष्ट्र विरोधी, जन विरोधी सोच है. झारखंड राज्य के साथ नाइंसाफ़ी है. इस फैसले को लेने के पहले देश के फर्टिलाइजर मिनिस्टर को झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री से बात करनी चाहिए थी, उन्हें विश्वास में लेना चाहिए था ताकि झारखंड राज्य की जनता की हित की रक्षा की जा सके.
राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महामंत्री ए.के. झा कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र प्रसाद सिंह एवं अनुपमा सिंह ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में भारत सरकार के फर्टिलाइजर मिनिस्टर से आग्रह किया है कि वो सिंदरी के मनोहरटांड और SL-2 के लगभग 1000 क्वार्टर को डिस्मेंटल करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें. आवास तोड़ने का निर्णय सिन्दरी के लिये आत्मघाती निर्णय है. यह ना तो मानवीय है,ना तो उचित है और ना ही झारखंड राज्य के हित में है.
इधर, फर्टिलाइजर फैक्ट्री वर्कर्स यूनियन के अजय कुमार ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि भारतीय उर्वरक निगम की सिंदरी इकाई के स्थानीय और केंद्रीय प्रबंधन द्वारा इस सार्वजनिक प्रतिष्ठान की संपत्तियों को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. एक तरफ केंद्र सरकार बेघर लोगों को रहने के लिए भवन निर्माण की योजना चला रही है, वहीं दूसरी ओर उर्वरक निगम प्रबंधन बसी-बसाई sl2 और मनोहरटांड़ कॉलोनी को उजाड़ने और ध्वस्त करने का फैसला ले चुकी है. इन कॉलोनीयों के ध्वस्त करने के पीछे प्रबंधन की मंशा साफ नहीं है. अभी इन कॉलोनी में सैकड़ो परिवार रह रहे हैं जो बेघर हो जाएंगें. निश्चाय ही प्रबंधन की इस कार्रवाई से कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने प्रधानमंत्री से कॉलोनी को उजाड़ने की योजना पर रोक लगाने के लिए संबंधित मंत्रालय को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है.