ढुल्लू महतो-चंद्रप्रकश चौधरी-शत्रुघन महतो से सवाल, क्यों बंद रहा कतरास, शहर बचाने को कुछ भी करने का ऐलान
भू-धंसान की घटनाओं से परेशान कतरास के लोगों ने गुरुवार को बंद रखा और गांधीवादी तरीके से आंदोलन किया. कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा ने पुनर्वास और जांच की मांग की.
धनबाद (DHANBAD): धनबाद के कतरास का ऐतिहासिक महत्व है. स्वतंत्रता आंदोलन में भी यह इलाका अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी. कई मंत्री, विधायक और सांसद इस इलाके के हुए, फिलहाल सांसद ढुल्लू महतो भी इसी इलाके में रहते है.उनके भाई फिलहाल विधायक है. इसके पहले ढुल्लू महतो तीन बार के विधायक रह चुके है. गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी के संसदीय क्षेत्र में यह इलाका आता है. लेकिन अब कतरास का धैर्य टूट गया है. कतरास गुरुवार को सड़क पर था.
भू-धंसान की घटनाओं से अजीज और शहर के अस्तित्व के खतरे से परेशान लोग गांधीवादी तरीके से सड़क पर उतरे. उन्हें इलाके के लोगों का भरपूर समर्थन मिला. लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं के विरोध में कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर गुरुवार को कतरास शहर, पंचगढ़ी बाजार और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में बंदी रखी गई थी. बंदी को लेकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों का समर्थन मिलने का दावा मोर्चा के सदस्यों ने किया है. आंदोलनकारियों ने कहा कि कतरास को भू-धंसान से बचाने के लिए शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से आंदोलन जारी रहेगा.
मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि बीसीसीएल को मेगा प्रोजेक्ट और भूमिगत खनन से जुड़े नियम-कानून और परियोजना की पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए. साथ ही भू-धंसान की घटनाओं और अवैध खनन के आरोपों की जांच होनी चाहिए. लोगों का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से कोयला खनन होना चाहिए, लेकिन विकास के नाम पर लोगों के घर और जीवन खतरे में नहीं डाले जा सकते. मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि भू-धंसान से प्रभावित लोगों की समस्या के समाधान और पुनर्वास को लेकर ठोस पहल नहीं हुई, तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर क्षेत्र एक से 12 तक चक्का जाम किया जाएगा. आंदोलनकारियों ने कहा कि जनता की आवाज जनप्रतिनिधियों और सरकार तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है.