बरवाअड्डा थाना विवाद में सियासत तेज,जयराम महतो के तेवर में कोई नरमी नहीं,बाबूलाल मरांडी का भी मिला साथ 

बरवाअड्डा थाना विवाद अब पुलिस और विधायक के बीच टकराव से आगे बढ़कर सियासी मुद्दा बन गया है. डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद को लेकर, जहां झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने विधायक से माफी मांगने को कहा है, वहीं जयराम महतो ने साफ कहा है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.

बरवाअड्डा थाना विवाद में सियासत तेज,जयराम महतो के तेवर में कोई नरमी नहीं,बाबूलाल मरांडी का भी मिला साथ

धनबाद(DHANBAD):  बरवाअड्डा थाना विवाद अब पुलिस और विधायक के बीच टकराव से आगे बढ़कर सियासी मुद्दा बन गया है.  डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद को लेकर, जहां झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने विधायक से माफी मांगने को कहा  है, वहीं जयराम महतो ने साफ कहा है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.  इसलिए माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। इसी बीच विधायक ने पूरे मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरी जानकारी दी है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी जय राम महतो के पक्ष में खड़े हो गए है. उन्होंने कई सवाल भी खड़े किये हैं. 

विधायक जयराम महतो ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में  कहा है कि वह सदन के निर्वाचित सदस्य हैं और विधायकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना विधानसभा अध्यक्ष का संवैधानिक दायित्व है.  उन्होंने कहा कि वह कानून से ऊपर होने का दावा नहीं कर रहे हैं.  यदि उनके खिलाफ कोई गंभीर अपराध है और उसके पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो कानून अपना काम करे। लेकिन उनका सवाल है कि क्या बिना पर्याप्त तथ्य और जांच के किसी विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना उचित है? विधायक के अनुसार, 21 अगस्त को उन्हें सूचना मिली थी कि गणेश दास नामक व्यक्ति के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई है। इसी जानकारी के बाद वह बरवाअड्डा थाना पहुंचे और थाना प्रभारी से इस संबंध में सवाल किया। 

उनका कहना है कि उन्होंने आरोपी को छोड़ने या पुलिस की कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए नहीं कहा था।जयराम महतो के मुताबिक, इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष के लोग भी थाना पहुंचे और उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर वह वहां से निकल गए। उनका कहना है कि इसके बावजूद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घटना थाना परिसर में हुई और वहां सीसीटीवी कैमरे और पुलिस अधिकारी मौजूद थे, तो उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई? विधायक ने अपने पत्र में पहले दर्ज कुछ मामलों का भी संक्षिप्त उल्लेख किया है। 

उनका आरोप है कि उनके खिलाफ शिकायतों पर कई बार पर्याप्त जांच किए बिना कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि वह विशेष कानूनी छूट नहीं चाहते, बल्कि दूसरे जनप्रतिनिधियों की तरह उनके मामलों में भी समान और निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।दूसरी ओर, झारखंड पुलिस एसोसिएशन बरवाअड्डा थाना प्रभारी के समर्थन में खुलकर सामने आया है। एसोसिएशन का आरोप है कि 21 अगस्त की रात विधायक ने वाट्सऐप कॉल के जरिए थाना प्रभारी से कथित तौर पर गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया तथा धमकी दी। इसके बाद विधायक और उनके समर्थकों के थाना पहुंचने तथा थाना प्रभारी के कार्यालय में कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है।एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए विधायक से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही माफी नहीं मांगने पर काला बिल्ला लगाकर विरोध करने और आगे महासंघ के निर्देश के अनुसार आंदोलन करने की बात कही है। 

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय भी मांगा है।अब , इस विवाद में नेता प्रतिपक्ष   बाबूलाल मरांडी भी जयराम महतो के समर्थन में सवाल उठाये है.  उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए पूछा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा की बात होनी चाहिए, लेकिन क्या यह जिम्मेदारी केवल जनप्रतिनिधियों की है? उन्होंने पुलिस के कथित अभद्र व्यवहार और बातचीत रिकॉर्ड कर वायरल किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि आम लोगों के साथ पुलिस द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल होता है, तो उस पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल बरवाअड्डा थाना विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर पुलिस एसोसिएशन अपने अधिकारी के सम्मान और सुरक्षा को लेकर मुखर है, तो दूसरी ओर जयराम महतो ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मामले में निष्पक्षता और समान कानूनी प्रक्रिया की मांग की है। अब सबकी नजर जांच की अगली कार्रवाई पर है.