नई पहल: धनबाद के विकास के लिए गैर-राजनीतिक मंच 22 जुलाई को देगा धरना, अब उपेक्षा नहीं होगी बर्दाश्त

नई पहल: धनबाद के विकास के लिए गैर-राजनीतिक मंच 22 जुलाई को देगा धरना, अब उपेक्षा नहीं होगी बर्दाश्त

धनबाद (DHANBAD): निरसा विधायक के पिता स्वर्गीय गुरदास चटर्जी हमेशा कहते थे कि धनबाद के विकास में सबसे बड़े बाधक यहां के जनप्रतिनिधि है. उनका मानना था कि धनबाद जिले में 6 विधायक हैं. गिरिडीह को मिला दिया जाए तो दो सांसद हो जाते है. ऐसे में अगर 6 विधायक और दो सांसद किसी काम को दलगत भावना से ऊपर उठकर ठान लें, तो कोई वजह नहीं है कि काम नहीं हो. मुख्यमंत्री चाहे कोई भी हो, प्रधानमंत्री चाहे कोई भी हो. 

उसी तर्ज पर उनके पुत्र निरसा  विधायक अरूप चटर्जी ने प्रयास शुरू किया है. रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि धनबाद में अब विकास की राजनीति की जरूरत है. सभी राजनीतिक और सामाजिक लोगों को एक मंच पर आना चाहिए और धनबाद के साथ जो भी उपेक्षा हुई है, उसको अतीत की बात मानकर नई शुरुआत करनी चाहिए. इसके लिए 22 जुलाई को रणधीर वर्मा चौक पर एकदिवसीय धरना देने का निर्णय लिया गया है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई राजनीतिक बात नहीं हुई. इसको एक अच्छी पहल कहा जाना चाहिए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मेयर  चंद्रशेखर अग्रवाल, पूर्व वियाडा अध्यक्ष विजय झा भी शामिल थे. 

शेखर अग्रवाल ने कहा कि धनबाद में बहुत कुछ है, लेकिन इसकी केवल नकारात्मक छवि को प्रचारित  किया जाता है. धनबाद में जो ऊर्जा है, उसका सही उपयोग नहीं किया जाता. अगर आईआईटी आईएसएम का ही सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो धनबाद के विकास में यह संस्थान बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है. उन्होंने कहा कि कोई काम होता है तो इसका श्रेय किसी व्यक्ति को लेने के बजाय जनता को मिलाना चाहिए. जनता जिन जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है, उनका काम ही होता है जनता के लिए काम करना. विजय झा ने कहा कि राजनीतिक माहौल का विकास पर बुरा असर पड़ता है. धनबाद का कोयला दूसरे राज्यों में जाकर उद्योग खड़ा कर देता है, लेकिन धनबाद में कोयला आधारित उद्योग मरणासन्न हैं. इसके लिए राजनीतिक माहौल पूरी तरह से जिम्मेवार है. अगर पहल शुरू हुई है तो इसे  मुकाम तक पहुंचाने की जरूरत है.