सांसद-मेयर विवाद का बड़ा साइड इफ़ेक्ट: बगैर किसी तामझाम के क्यों रवाना हुई धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत ट्रेन, पढिए
धनबाद से कोयंबटूर के बीच अमृत भारत ट्रेन बिना किसी बड़े उद्घाटन कार्यक्रम के रवाना हुई. सांसद ढुल्लू महतो की गैरमौजूदगी और रेलवे अधिकारियों की अनुपस्थिति के बीच पुराने उद्घाटन विवाद की चर्चा फिर तेज हो गई.
धनबाद (DHANBAD): धनबाद रेलवे स्टेशन पर घड़ी की सुई चार बजा रही थी, लेकिन ना कोई तामझाम दिख रहा था, ना कोई कार्यक्रम की तैयारी थी. सांसद ढुल्लू महतो के प्रतिनिधि सहित भाजपा के कुछ नेता और कार्यकर्ता जरूर मौजूद थे. जो सांसद के समर्थन में नारे लगा रहे थे. मतलब धनबाद से कोयंबटूर के बीच अमृत भारत ट्रेन आज बिना किसी तामझाम के चली गई. इसी साल अप्रैल महीने में धनबाद से मुंबई के बीच चली धनबाद लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन के उद्घाटन का विवाद साफ-साफ दिखा.
विवाद का साइड इफेक्ट इतना असरदार रहा कि रेलवे के कोई बड़े अधिकारी भी नहीं दिखे. सांसद, विधायक भी स्टेशन पर नहीं नजर आये. ट्रेन रवाना हो गई, सांसद प्रतिनिधि नितिन भट्ट ने बताया कि सांसद धनबाद से बाहर है. उनकी अनुपस्थिति में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ट्रेन के कर्मचारियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ढुल्लू महतो के सांसद बनने के बाद धनबाद को अब तक 8 ट्रेन मिली है. लेकिन बिना किसी कार्यक्रम के ट्रेन के रवाना होने से चर्चा धनबाद के हर चौक-चौराहे पर हो रही है. लोग इसे पहले के विवाद से जोड़ कर देख रहे हैं.
बता दें कि इसी साल अप्रैल महीने में धनबाद से मुंबई के बीच चली धनबाद लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन के उद्घाटन के कार्यक्रम को लेकर धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और मेयर संजीव सिंह के बीच राजनीतिक विवाद हुआ था. विवाद का मुख्य बिंदु संजीव सिंह का आमंत्रण रद्द करने का था. रेलवे ने पहले मेयर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को उद्घाटन में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया था. उद्घाटन कार्यक्रम शुरू होने के कुछ घंटे पहले रेलवे ने मेयर का निमंत्रण रद्द कर दिया और बैनर पोस्टर से उनके नाम हटा दिए. बाद में सांसद ढुल्लू महतो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस विवाद में काफी तूल पकड़ा. संजीव सिंह ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और इसकी शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद एक दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का भी दौर चला. आरोप तो यह भी लगा कि सांसद के दबाव में रेलवे अधिकारियों ने मेयर का निमंत्रण रद्द किया था. इस घटना से रेलवे अधिकारियों ने बड़ा सबक लिया है.