धनबाद (DHANBAD): दिल्ली के निर्देश के बाद कोयलांचल की आबो-हवा बदल रही है. कोयला चोरी और चोरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो रही हैं, तो यह भी निर्णय ले लिया गया है कि बीसीसीएल की कोलियरी परिसर और आउटसोर्सिंग कंपनियां का परिसर कटीलें तारों के बेड़े में रहेंगें. यह अलग बात है कि इसके सुझाव बहुत पहले से दिए जाते रहे थे, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था. दिल्ली के निर्देश के बाद कोयला अधिकारियों को बड़ी ताकत मिली है. सीआईएसएफ को मजबूत किया गया है. उन्हें अतिरिक्त अधिकार दिया गया है.
अब सीआईएसफ सीधा एक्शन के मूड में है. नतीजा है कि बीसीसीएल के "समानांतर कोयला खदान" चलाने वाले कोयला चोर और तस्कर और उनके आंका अब "बिल" में दुबक गए हैं. दिल्ली का आदेश है, इसलिए भी ऐसे लोगों की बोलती बंद है. दरअसल, शनिवार को बीसीसीएल मुख्यालय में बड़ी बैठक हुई है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि इस बैठक में सभी निदेशक, सीआईएसएफ के डीआईजी और तमाम एरिया के महाप्रबंधक मौजूद थे. इस बैठक में एक और बड़ा निर्णय लिया गया कि आउटसोर्सिंग एवं एमडीओ संचालित सभी खदानों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से एकीकृत सीसीटीवी निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी.
रेलवे साइडिंग, कोयला खदानों और डम्पों एवं खुले क्षेत्र के चारों ओर चारदीवारी एवं कटीले तारों से घेराबंदी की जाएगी. दरअसल, कोयलांचल में कोयला चोरी लाइलाज बीमारी हो गई है. जिस तरह से एक्शन चल रहा है, अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आज नहीं तो कल, बीसीसीएल के कोयले की डिमांड बढ़ जाएगी. उल्लेखनीय है कि अवैध उत्खनन और कोयला तस्करी की स्थिति ऐसी हो गई है कि बीसीसीएल के कोयले का डिमांड घट गया है.
बीसीसीएल का कोयला जहां 12 से 15000 रुपए प्रति टन मिलता है, वहीं कोयला चोर और तस्कर₹5000 प्रति टन के हिसाब से कोयला पहुंचा रहे थे. धनबाद में साफ सुथरा तरीके से कोयला आधारित उद्योग चलाने वाले हाथ पैर समेट कर बैठ गए हैं. उनका मानना है कि वह बाजार में टिक नहीं पा रहे हैं. कोयलांचल में एक समय में लगभग डेढ़ सौ हार्ड कोक भट्ठे चल रहे थे, लेकिन अब 25% भी चालू हालत में नहीं हैं. भट्ठे वही चल रहे हैं, उन्हीं की चिमनिया धुआं उगल रही है, जहां चोरी के कोयले का उपयोग हो रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि स्थितियां कितनी तेजी से बदलती हैं और अवैध धंधे की बदौलत अकूत धन संपत्ति अर्जित किए माफिया आगे क्या करते हैं?

