LB Singh की पत्नी ने ED से कहा- मेरा एक- एक पैसा व्हाइट, जानिए कौन है धनबाद का यह धनकुबेर
कोयला के वैध -अवैध कारोबारियों के ठिकानो पर ईडी की छापेमारी और जाँच सहित पूछताछ की कार्रवाई से पूरा कोयलांचल सहमा हुआ है. यहाँ के कारोबारियों की यह खासियत है कि कौन किसके साथ किस धंधे में जुड़ा हुआ है ,किसी को पता नहीं चलता। खुलासा तब सामने आता है, जब किसी एजेंसी की रेड होती है.
धनबाद(DHANBAD): कोयला के वैध -अवैध कारोबारियों के ठिकानो पर ईडी की छापेमारी और जाँच सहित पूछताछ की कार्रवाई से पूरा कोयलांचल सहमा हुआ है. यहाँ के कारोबारियों की यह खासियत है कि कौन किसके साथ किस धंधे में जुड़ा हुआ है ,किसी को पता नहीं चलता। खुलासा तब सामने आता है, जब किसी एजेंसी की रेड होती है. इधर ,बड़ी सूचना है कि प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ में धनबाद के कोयला कारोबारी एवं आउटसोर्सिंग कंपनी मालिक एलबी सिंह की पत्नी आरती सिंह ने कहा है कि उनका एक-एक पैसा व्हाइट है. सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने छापे में मिले कागजात, सेल डीड , निवेश के कागजात सामने रखकर आरती सिंह से उनकी आय के बारे में पूछताछ की.
सूत्र बताते हैं कि आरती सिंह ने बताया कि पति कोयले का वैध कारोबार करते हैं. परिवार की सभी संपत्तियां कोयला व्यवसाय से हुए शुद्ध लाभ से अर्जित की गई है. ईडी अब आरती सिंह के बयान का मिलान जब्त वित्तीय रिकॉर्ड से कर सकती है. आरती सिंह को सोमवार को रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय बुलाया गया था. उनसे दिन भर पूछताछ की गई. बताया जाता है कि ईडी के अधिकारियों ने आरती सिंह से उनके पति के कोयला कारोबार और उनके नाम पर किए गए निवेश के बारे में पूछताछ की. इसके पहले दो बार उन्हें समन भेजा गया था. लेकिन उन्होंने समय की मांग कर नहीं गई. तीसरे समन पर वह सोमवार को जांच एजेंसी के सामने पेश हुई.
बता दें कि ईडी के अधिकारियों ने पिछले साल नवंबर महीने में छापेमारी के बाद 29 जुलाई 26 को एलबी सिंह एवं उनके सहयोगियों के 31 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. एलबी सिंह के 160 करोड रुपए के म्युचुअल फंड को ईडी ने फ्रिज किया था. जांच में ईडी को पता चला कि उनमें से ज्यादातर संपत्ति और निवेश आरती सिंह के नाम पर है. उल्लेखनीय है कि छापे में मिले दस्तावेज के आधार पर ईडी ने एलबी सिंह के करीबी कई लोगों को भी समन भेजा है. एलबी सिंह धनबाद में कोयला खनन की आउटसोर्सिंग कंपनी चलाते हैं.
फिलहाल वह "आउटसोर्सिंग किंग" भी कहे जाते हैं. उन्होंने लंबा -चौड़ा कारोबार फैला लिया है. भाजपा से जुड़े होने की बात भी कही जाती है. 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कथित तौर पर धनबाद से भाजपा का टिकट लेने का प्रयास भी किया था. लेकिन सफलता नहीं मिली। अभी भी वह सामाजिक एवं संस्कृतिक कार्यक्रमों में देखे जाते हैं.
सूत्र बताते हैं कि एलबी सिंह सबसे पहले कोयलांचल में तब चर्चा में आए, जब दशकों पहले आयकर विभाग की छापेमारी उनके झरिया के शिमलाबहाल स्थित आवास पर हुई थी. इस दौरान झरिया के बैंक ऑफ़ इंडिया( ऐना शाखा)में एलबी सिंह और उनके रिश्तेदारों के नाम पर चल रहे कई बैंक खातों को सीज किया गया था. जिसमें करीब 100 करोड रुपए जमा बताए गए थे. उस समय इस छापेमारी की पूरे देश में खूब चर्चा हुई थी. उसके बाद ही एलबी सिंह का नाम लोगों की जुबान पर आ गया.
इधर ,प्रवर्तन निदेशालय ने नवंबर 2025 में झारखंड में बड़ी छापेमारी की थी. जानकारी के अनुसार ईडी में एलबी सिंह, अनिल गोयल और उनसे जुड़े लोगों और संस्थाओं के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी. यह छापेमारी धनबाद और दुमका के करीब 20 ठिकानों पर एक साथ हुई थी. इस छापेमारी में ईडी को डेढ़ सौ से अधिक जमीन के दस्तावेज और 2 करोड़ से अधिक नगदी मिले थे. ईडी को छानबीन में अवैध तरीके से कोयला खनन, परिवहन और भंडारण से संबंधित साक्ष्य मिले थे.
उसके बाद ईडी ने 29 जुलाई 2026 को एक बार फिर छापेमारी की. यह छापेमारी अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव, माधव सिंह और इनसे जुड़ी कंपनी एवं सहयोगियों, रिश्तेदारों के 31 ठिकानों पर की गई थी. इस दौरान ईडी ने एलबी सिंह के माध्यम से म्युचुअल फंड में किए गए लगभग 160 करोड रुपए के निवेश को फ्रिज किया था. अब ईडी इन रुपयों के स्रोत का पता लगा रही है. समन निर्गत कर सम्बंधित लोगो को पूछताछ के लिए बुला रही है.