धनबाद(DHANBAD): झारखंड राज्य सभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार की हार के बाद कांग्रेस इस सदमे से उबर नहीं पा रही है. कभी आगे, तो कभी पीछे की राजनीति के अलावा बहुत संभल कर कदम बढ़ा रही है. अब तक यह बात सिर्फ आरोपो तक ही सीमित है कि राजद और माले के विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं किया। लेकिन सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अभी भी इस आरोप पर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है. कांग्रेस के भीतर से ही खेल की बात छन छन कर बाहर आ रही है. राजद और माले के कड़े प्रतिवाद के बाद कांग्रेस बैकफुट पर है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हार की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है?
18 जून को परिणाम आते ही शुरू हुआ था आरोपों का दौर ----
बता दें कि 18 जून को परिणाम आते ही कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया था कि राजद और माले के विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं दिए. उन्होंने इन नेताओं पर कार्रवाई की भी मांग की थी. लेकिन अब बहुत कुछ बदल रहा है. कांग्रेस के ही विधायको पर ही शक की सुई घूम रही है. पूरी रिपोर्ट दिल्ली पहुंच गई है. यह अलग बात है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस मामले को अब आगे बढ़ना नहीं चाहता है. पार्टी की पहले ही किरकिरी हो चुकी है. कांग्रेस विष पीने की बात कर चुकी है. कांग्रेस के अगर भीतर से ही सब कुछ हुआ है, तो खुलासा होने के बाद पार्टी की और किरकिरी हो सकती है. प्रणव झा की हार के बाद आरोप - प्रत्यारो प्रत्यारोप शुरू हुआ था. राजद और माले ने कड़ा प्रतिवाद भी किया था. राजन और माले ने कांग्रेस को सबूत पेश करने को कहा था. कांग्रेस प्रभारी के राजू के बयान को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया था.
माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी किया था कड़ा प्रतिवाद -----
माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी पार्टी को बेवजह बदनाम किया जा रहा है. इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। बयानबाजी बंद होनी चहिये। इसके बाद बिहार के पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने भी आरोप लगाया था कि कैसे चुनाव हुआ. उन्होंने भी कांग्रेस के दो विधायकों के बारे में कहा था कि उन पर नजर रखी जा रही थी. खैर जो भी हो, लेकिन राज्यसभा का चुनाव के मामले में कांग्रेस खुद में घिरती दिख रही है. उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव बीत जाने के बाद सत्ता रुड गठबंधन की ओर से और नहीं किसी दल की ओर से चुनाव परिणाम की समीक्षा की गई है. कांग्रेस भी अब शांत पड़ गई है. गठबंधन में समीक्षा की जो बात हो रही थी, वह अब ठंडा बस्ती में चली गई दिख रही है.

