मन्नान मल्लिक बनना आसान नहीं: सूर्यदेव सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने से लेकर मंत्री तक का कैसे तय किया सफर 

झारखंड के पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक अब नहीं रहे, लेकिन उनकी कमी धनबाद के लोगों को खलती रहेगी. वह कांग्रेस में रहते हुए भी सबके थे. कभी किसी समुदाय की राजनीति नहीं की और न हीं समाज पर इसे हावी होने दिया। यह अलग बात है कि बिहार से लेकर झारखंड तक की राजनीति में वह अंतिम समय तक सक्रिय रहे. झरिया से सूर्य देव सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ें , जिस समय सूर्य देव सिंह के खिलाफ उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा उसकी चर्चा लोग आज भी करते है.

मन्नान मल्लिक बनना आसान नहीं: सूर्यदेव सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने से लेकर मंत्री तक का कैसे तय किया सफर

tnp desk:  झारखंड के पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक  अब नहीं रहे, लेकिन उनकी  कमी धनबाद के लोगों को खलती  रहेगी. वह कांग्रेस में रहते हुए भी सबके थे.  कभी किसी समुदाय की राजनीति नहीं की और न हीं समाज पर इसे हावी होने दिया. यह अलग बात है कि बिहार से लेकर झारखंड तक की राजनीति में वह अंतिम समय तक सक्रिय रहे.  झरिया से सूर्य देव सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ें , जिस समय सूर्य देव सिंह के खिलाफ उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा उसकी चर्चा लोग आज भी करते है.  उनकी राजनीतिक सफर शुरू हुई थी बिहार से.  बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में वह राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी.  

2009 में पहली  और अंतिम बार वह विधायक बने और फिर हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बने.  लोग बताते हैं कि 1990 में वह झरिया से कांग्रेस के उम्मीदवार थे और उनके सामने थे जनता पार्टी से सूर्य देव सिंह।  1995, 2000 और 2005 में भी उन्होंने धनबाद विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह को पराजित नहीं कर सके.  2009 के चुनाव में मन्नान मल्लिक  ने पहली बार जीत दर्ज की और उन्होंने भाजपा को उम्मीदवार राज सिन्हा  को पराजित किया और फिर मंत्री बने. . मन्नान मल्लिक के निधन से धनबाद को एक बड़ी क्षति हुई है. स्पष्टवादी मन्नान मल्लिक को जिसे भी कुछ कहना होता, खुलकर कहते थे. सबसे खुलकर मिलते थे. उनकी उम्र लगभग 83 साल थी .

राजनीति में भी उनकी अलग पहचान थी . कहा जाये तो उनकी पहचान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं थी, बल्कि कोयलांचल की मजदूर राजनीति में भी उनकी पकड़ मजबूत थी. उन्होंने श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों में सुधार को लेकर लगातार आवाज बुलंद की. 2009 में हेमंत सोरेन की सरकार में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री बने थे. मंत्री रहते हुए उन्होंने धनबाद के लिए बड़े काम किए. उन्होंने धनबाद को पहला 6000 लीटर क्षमता वाला सरकारी डेयरी प्लांट दिया. मन्नान मल्लिक ने ही  भू दा में मेधा डेयरी की शुरुआत कराई थी. मंत्री रहते हुए शहर के मोहल्ले में पक्की सड़क का निर्माण कराया था. 

धनबाद कोर्ट में उन्होंने बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस भी की थी. धनबाद में कांग्रेस को मजबूत करने वाला उन्हें नेता माना जाता था और यही वजह है कि एक दशक से अधिक समय तक वह कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे. वह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ और राष्ट्रीय कोलियरी  मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे. 2011 में जब  मट कुरिया में आवास खाली कराए जा रहे थे, उस समय अन्य के साथ वह चट्टान बनकर खड़े दिखे. इसी मामले में बीते शुक्रवार को उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई थी. यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है। उस दिन मटकुरिया क्षेत्र में बीसीसीएल के क्वार्टरों को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंची पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।