धनबाद(DHANBAD) : कतरास का छाताबाद आंदोलन का एक नया सेंटर पॉइंट बनने जा रहा है. भू -धंसान के बाद लोग आक्रोशित हैं, तो लोगों का आना-जाना भी जारी है. रविवार को झारखंड के मंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता पहुंचे और भू -धंसान के लिए स्थानीय जनता प्रतिनिधियों को दोषी ठहराया, तो दूसरी ओर झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो भी रविवार को धरना दे रहे लोगों का मनोबल बढ़ाने पहुंचें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भू-धंसान की घटनाएं अवैध उत्खनन की परिणिति है और जिन लोगों ने भी कोयले के अवैध खनन से धन कमाया है, उनके लिए यह प्रायश्चित करने का मौका है. वह प्रभावित लोगों की दुख पीड़ा में खड़े हो. उन्होंने आह्वान किया कि जो भी लोग अवैध कोयला के खनन से पैसा कमाए हैं, उससे प्रभावित लोगों की मदद करें। उनके लिए प्रायश्चित का यह मौका है.
विधायक जयराम महतो ने एक के बाद एक कई सवाल किये
साथ ही उन्होंने कहा कि वह आंदोलन कार्यो के साथ हैं और सुझाव दिया कि आंदोलन को छाताबाद से हटाकर जिला मुख्यालय तक ले जाया जाए. जयराम महतो और उनकी पार्टी का आंदोलन को पूरा समर्थन था है और रहेगा। बता दे कि धनबाद के कतरास स्थित बहुचर्चित छाताबाद भू-धंसान स्थल पर सोमवार को टाइगर जयराम महतो पहुंचे, इस दौरान उन्होंने भू-धंसान की घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और बीसीसीएल प्रबंधन पर सवाल उठाये।
जयराम महतो ने कहा कि भू-धंसान का एक प्रमुख कारण कोयले की अवैध निकासी है. कतरास क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं और अगर अवैध खनन पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं होती रहेंगीं।
घटना को बताया अवैध खनन का परिणाम
उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि अपनी कमाई बढ़ाने के लिए कोयले के अवैध कारोबार में संलिप्त हैं. साथ ही, उन्होंने जिला प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भू-धंसान वाले डेंजर जोन को चिन्हित कर वहां रहने वाले लोगों को पहले से आगाह किया जाना चाहिए। साथ ही, खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए। बीसीसीएल प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए जयराम महतो ने कहा कि अगर स्थानीय लोगों की मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन को धनबाद के बीसीसीएल मुख्यालय से लेकर रांची तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों के आशियाने को बचाने की लड़ाई सिर्फ सड़क पर ही नहीं, बल्कि विधानसभा में भी उठाई जाएगी।

