रांची, धनबाद और संथाल तक कैसे फैला है बच्चा चोर गिरोह का सिंडिकेट? रांची से अपहृत मासूम साहिबगंज से कैसे हुआ बरामद, पढ़िए

रांची से अपहृत 4 वर्षीय बच्चे को धनबाद पुलिस ने साहिबगंज से सकुशल बरामद कर लिया है. मामले में धनबाद स्टेशन से राहुल बनर्जी नामक युवक को गिरफ्तार किया गया, जिसकी निशानदेही पर तीन पहाड़ में छापेमारी कर बच्चे को बरामद किया गया.

रांची, धनबाद और संथाल तक कैसे फैला है बच्चा चोर गिरोह का सिंडिकेट? रांची से अपहृत मासूम साहिबगंज से कैसे हुआ बरामद, पढ़िए

धनबाद (DHANBAD): बच्चा चोरों का रांची से लेकर धनबाद और धनबाद से लेकर संथाल परगना तक एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. यह झारखंड पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती है. रांची के एक मासूम की बरामदगी से यह बात स्पष्ट हुआ है. रांची से अपहृत 4 साल के बच्चे को अगवा करने वाले गिरोह के एक सदस्य को धनबाद स्टेशन से पकड़ा गया. उसका नाम राहुल बनर्जी बताया गया है. वह साहिबगंज के तीन पहाड़ का रहने वाला बताया जाता है. उसकी निशानदेही पर तीन पहाड़ से अपहृत रांची के मासूम को सकुशल बरामद कर लिया गया है. जानकारी के अनुसार धनबाद पुलिस की टीम आरपीएफ और रेल पुलिस की मदद से राहुल बनर्जी को पकड़ा, जिस समय वह पकड़ाया, उस समय वह नशे में था. 

बच्चा साहिबगंज से किया गया है बरामद, मां के हवाले किया गया बच्चा  

उससे पूछताछ की गई, तो बताया कि बच्चा तीन पहाड़ में बिट्टू के घर पर है. धनबाद पुलिस की मदद से साहिबगंज पुलिस ने तीन पहाड़ में छापेमारी कर आरोपी बिट्टू के घर से बच्चे को बरामद कर लिया है. दरअसल, धनबाद एसएसपी को रांची पुलिस की ओर से बच्चे को अगवा करने वाले के संबंध में बताया गया था कि अपहर्ता का संभावित लोकेशन धनबाद स्टेशन के आसपास मिल रहा है. धनबाद पुलिस और आरपीएफ की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसकी तलाश शुरू की. धनबाद स्टेशन के अलावे पुराना बाजार और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया. मोबाइल लोकेशन के आधार पर देर रात तक पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त टीम आरोपियों को पकड़ने और बच्चे की बरामदगी  के लिए लगी रही. वनांचल एक्सप्रेस के धनबाद पहुंचते ही टीम को सफलता मिल गई. 

राहुल बनर्जी वनांचल एक्सप्रेस से साहिबगंज जाने की फिराक में था
 
राहुल बनर्जी वनांचल एक्सप्रेस से साहिबगंज जाने की फिराक में था. उसकी गिरफ्तारी से गिरोह का भेद खुल गया. बच्चे की रांची से गुमशुदगी के बाद चुटिया थाने की पुलिस ने छानबीन शुरू की. रांची स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि बच्चे को एक हाफ पैंट वाला लड़का अपने साथ ले जा रहा है. अन्य सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को देखने पर ऐसा लगा कि हाफ पैंट वाला लड़का अकेले नहीं था. जबकि उसके साथ अन्य तीन भी इस ग्रुप में शामिल थे. बच्चे की तलाश को रांची एसएसपी ने स्पेशल टीम का गठन किया था. स्पेशल टीम मान रही थी कि चार लोगों के गैंग ने बच्चे का अपहरण किया है. इसमें हाफ पेंट वाला संदिग्ध भी शामिल था. धनबाद पुलिस की टीम रांची स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज से मिले चारों की तस्वीर के अलावा बच्चों के फोटो के आधार पर खोजबीन कर रही थी. फोटो के मिलान के आधार पर ही राहुल बनर्जी को पकड़ा गया. 

छत्तीसगढ़ से माँ और बहन के साथ रांची आया था बच्चा 

दरअसल, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक महिला 24 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे अपने 4 वर्षीय पुत्र और 6 वर्षीय पुत्री के साथ रांची स्टेशन पहुंची थी. वह एक बस के संबंध में ऑटो वालों से पूछताछ कर रही थी. दोनों बच्चे फुट ओवर ब्रिज के पास लगे एक्सीलेटर के बगल में खड़े थे. इसी दौरान बच्चा वहां से लापता हो गया. पुलिस को प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बच्चों का अपहरण कर उसे भिक्षाटन करने के काम में लगाया जाता है. बड़ा होने पर उन्हें बाजार-हाट में मोबाइल चोरी की घटनाओं में भी लगाया जाता है. धनबाद से गिरफ्तार राहुल बनर्जी को रांची पुलिस अपने साथ ले गई है. वहीं सूचना के मुताबिक देर रात बिट्टू और बरामद बच्चों को लेकर पुलिस साहिबगंज से रांची के लिए रवाना हो गई है. वह रांची पहुंच गई है. 

जनवरी महीने में रांची से दो बच्चों का हुआ था अपहरण 

आपको याद होगा कि रांची से इसी साल के जनवरी महीने में दो मासूम बच्चों अंश और अंशिका का अपहरण हो गया था. 12 दिनों तक रांची पुलिस की किरकिरी होती रही. धरना- प्रदर्शन हुआ, पुलिस का पूरा अभियान फेल होता जा रहा था. दूसरी ओर पुलिस पर दबाव बढ़ता जा रहा था, लेकिन 12 दिनों के बाद रांची पुलिस ने रामगढ़ से उन्हें सकुशल बरामद कर लिया था. पुलिस ने एक महिला सहित दो अपहरण कर्ताओं को पकड़ा भी था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर बच्चों और उनके माता-पिता की एक तस्वीर साझा की थी.  

अंश-अंशिका की सकुशल बरामदगी पर सीएम ने भी पीठ ठोंकी थी 

मुख्यमंत्री ने कहा था एक मां और परिवार ही इस पल की असीमित खुशी महसूस कर सकते हैं. झारखंड पुलिस की टीम को भी शानदार सफलता के लिए बधाई दी थी. अपहरण कर्ताओं ने छिपने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया था. रामगढ़ में उन्होंने रोशन आरा नामक एक बुजुर्ग महिला के घर में 1000 महीने पर कमरा किराए पर लिया था. खुद को बिहार का बेघर और गरीब बता कर, उन्होंने इंसानियत के नाते शरण ली थी. वह खुद को बर्तन बेचने वाले बताते थे. दिन भर बच्ची को साथ लेकर निकलते थे, जबकि बच्चा घर पर ही रहता था. मकान मालकिन के अनुसार उन्होंने कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वह बच्चों के माता-पिता नहीं हैं.