अतीत के पन्नों से : कैसे जब कल्पना सोरेन अपनी पहली सभा में भावुक हुई तो सोनू ने जेल का ताला टूटेगा... से बढ़ाया था हौसला?

सुदीव्य कुमार सोनू के निधन से झामुमो और सोरेन परिवार को बड़ा झटका लगा है. कल्पना सोरेन के राजनीतिक सफर में सोनू की अहम भूमिका रही और मुश्किल दौर में उन्होंने परिवार के संकटमोचक की भूमिका निभाई.

अतीत के पन्नों से : कैसे जब कल्पना सोरेन अपनी पहली सभा में भावुक हुई तो सोनू ने जेल का ताला टूटेगा... से बढ़ाया था हौसला?

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सुदीव्य कुमार सोनू के निधन से झामुमो को बड़ा झटका लगा है. सबको याद होगा कि जब हेमंत सोरेन 2024 में जेल में थे और कल्पना सोरेन गिरिडीह में पार्टी की पहली सभा को संबोधित कर रही थी, तब वह घबरा गई थी. भावुक हो गई थी. उनकी आंखों में आंसू छलक गए थे और उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी थी. उस समय सुदिव्य कुमार सोनू ने कल्पना सोरेन का हौसला बढ़ाने के लिए, "जेल का ताला टूटेगा, हेमंत सोरेन छूटेगा" का मंच से नारा लगाकर उसने उनका हौसला बढ़ाया था. इसके बाद कल्पना सोरेन ने अपना भाषण पूरा किया था. 

इसके बाद कल्पना सोरेन ने मई  2024 में गांडेय  विधानसभा का उपचुनाव चुनाव लड़ा था और भाजपा के दिलीप वर्मा को पराजित किया था. कल्पना सोरेन के चुनाव अभियान को सोनू ने ही संभाला था. दरअसल, यह सीट झामुमो के सरफराज अहमद के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी. उस समय चर्चा थी कि सरफराज अहमद का सीट खाली कराकर कल्पना सोरेन को चुनाव लड़ाया जाएगा और उन्हें मुख्यमंत्री की कमान दी जा सकती है. लेकिन झामुमो  के विधायकों में सहमति नहीं बनी और चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बनाए गए. यह समय झामुमो के लिए कठिन समय था. सोरेन परिवार संकट में था. चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन कल्पना सोरेन की सक्रियता बनी रही. 

राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा के समापन समारोह में कल्पना सोरेन ने आकर्षक भाषण देकर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था और कहा जाने लगा कि झामुमो को एक मजबूत नेत्री मिल गई है. यह अलग बात है कि 5 महीने बाद जब हेमंत सोरेन जेल से बाहर आए, तो चंपई सोरेन को त्यागपत्र देना पड़ा और हेमंत सोरेन फिर से मुख्यमंत्री बन गए. उसके बाद चंपई सोरेन भाजपा में चले गए. खैर, फिर हम कल्पना सोरेन की बात करते है. कल्पना सोरेन गांडेय विधानसभा सीट से दूसरी बार 2024 में चुनाव लड़ी और भाजपा की मुनिया देवी को पराजित किया.

कल्पना सोरेन जब भी गांडेय पहुंचती सोनू उनके साथ रहते थे. कहा तो यह भी जाता है कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में जब झामुमो सत्ता में लौटा, तो सुदीव्य कुमार सोनू को सरकार में मंत्री बनवाने में कल्पना सोरेन का बड़ा हाथ था. उनके पास लंबे चौड़े विभाग थे. पुराने लोग यह भी बताते हैं कि  सोनू का संबंध स्वर्गीय दुर्गा सोरेन से भी बहुत अच्छा था. कहा  जा सकता है कि सोनू सिर्फ हेमंत सरकार में प्रभावशाली मंत्री ही नहीं थे, बल्कि सोरेन परिवार के लिए बहुत खास थे. वह सोरेन परिवार के हर संकट के समय संकट मोचक की भूमिका में दिखते रहे.