कोयलांचल में राजनीति चमकाने के लिए क्यों जरुरी है कोयला मजदूर संगठन का साथ,नेता कैसे होते हैं लाभान्वित

कोयलांचल में राजनीति चमकाने के लिए क्यों जरुरी है कोयला मजदूर संगठन का साथ,नेता कैसे होते हैं लाभान्वित

धनबाद(DHANBAD) : धनबाद -झरिया में मजदूर संगठन के बिना किसी की राजनीति "चमक" नहीं सकती है.  यह बात धनबाद के छह  विधानसभा क्षेत्र में से कुछ और में भी लागू होती है.  कुछ उदाहरण को छोड़ दें, तो कहा जा सकता है कि बिना मजदूर राजनीति के कोयलांचल में व्यक्ति की राजनीति चमक नहीं सकती है.  इसलिए भी कोयलांचल में मजदूर संगठनों की भरमार है.  धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो  भी लाल झंडे की मजदूर राजनीति करते है.  

बीसीसीएल मुख्यालय से लेकर एरिया कार्यालय तक रहता दबदबा

दरअसल ,बीसीसीएल मुख्यालय से लेकर एरिया कार्यालय तक के अधिकारियों को यूनियन का "झंडा" दिखाकर मनमर्जी की जाती है.  मजदूर संगठन में आने-जाने का खेल भी खूब होता है.  सब कुछ यहां कोयला मजदूरों के नाम पर ही किया जाता है.  भले ही उसकी आड़ में अपनी स्वार्थ सिद्धि हो.  हर सप्ताह यह देखने और सुनने को मिलता है कि उस यूनियन को छोड़कर लोग इस यूनियन में आए हैं. फिर क्यों उनकी घर वापसी होती है.  

राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर संघ और जनता मजदूर  संघ में भी विवाद 
 
उदाहरण के लिए राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर संघ से अलग होकर सूर्य देव सिंह ने जनता मजदूर संघ का गठन किया था.  उस समय राष्ट्रीय कोलियरी  मजदूर संघ से जनता मजदूर संघ की प्रतियोगिता थी.  सूर्यदेव सिंह आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे, तो रामनारायण शर्मा, पंडित बिंदेश्वरी दुबे जैसे लोग राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर संघ की साख  को बचाने में लगे हुए थे.  फिलहाल अगर कहा जाए तो सूर्य देव सिंह गठित जनता मजदूर संघ चार टुकड़ों में बंट  गया है.  जनता मजदूर संघ( बच्चा गुट),  जनता मजदूर संघ (कुंती गुट ), विधायक रागिनी सिंह का जनता श्रमिक संघ और राम धीर  सिंह की बहू आसनी सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता कामगार संघ  कोयलांचल में काम कर रहे हैं. 

चार लेबर कोड लागू होने का क्या पड़ेगा असर 

 यह  अलग बात है कि चार लेबर कोड  लागू होने के बाद इन यूनियन के अस्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा, अस्तित्व बचेगा  अथवा नहीं, यह अभी समय के गर्भ में है.  लेकिन कहा जा सकता है एक ही परिवार की चार यूनियन अभी सक्रिय हैं.  दरअसल, यूनियन बदलने का खेल भी बड़ा दिलचस्प होता है.  चारों यूनियन से जुड़े लोग  मूल रूप से सूर्य देव सिंह गठित जनता मजदूर संघ के ही लोग हैं.  जब उन्हें लगता है कि उनकी पूछ घट रही है, तो वह सिंह मेंशन परिवार के दूसरे गुट  के यूनियन में चले जाते हैं.  फिर वहां जब पूछ  घटती है, तो वापस लौट आते हैं. 

जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) की अध्यक्ष फिलहाल पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह हैं
 
यहां यह कहना भी जरूरी है कि जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) की अध्यक्ष फिलहाल पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह हैं.  बच्चा बाबू के निधन के बाद ऐसा निर्णय लिया गया था. 1977 के बाद से अगर बात की जाए तो  सूर्यदेव सिंह झरिया विधानसभा से चार बार विधायक रहे.  उनके निधन के बाद दो बार उनकी पत्नी और एक बार उनका बेटा विधायक रहे. उनके भाई बच्चा सिंह भी विधायक रहे.    सूर्यदेव सिंह के भाई की बहू पूर्णिमा नीरज सिंह  झरिया विधानसभा से विधायक रही. .अभी सिंह मेन्शन की रागनी सिंह झरिया से विधायक है. पूर्व सांसद एके राय भी कोयला मजदूरों का यूनियन चलते थे. यूनियन अभी भी अस्तित्व में है. निरसा विधायक अरूप चटर्जी उसके वाहक बने हुए है. यह अलग बात है कि एके राय की पार्टी का माले में विलय कर दिया गया है.