धनबाद(DHANBAD): धनबाद कोयलांचल में हलचल है. जिधर जाइये , उधर ही प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी की चर्चा चल रही है. लोग अपने-अपने ढंग से चर्चा कर रहे हैं. कोयले के अवैध धंधे से अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले लोगों का अब आगे क्या होगा, इसकी भी खूब चर्चा हो रही है. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार की सुबह छापेमारी अभियान शुरू किया. यह अभियान रांची जोनल ऑफिस द्वारा शुरू किया गया था. पीएमएलए 2002 अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गई है. जांच एजेंसी को आशंका है कि अवैध धंधे से कमाई राशि को बड़े पैमाने पर जहां-तहाँ निवेश किया गया है.
टीम ने धनबाद में कुल 31 ठिकानो पर की है रेड
ईडी के अनुसार टीम ने अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान सहित अन्य तथा उनसे जुड़े लोगों के 31 ठिकानों पर छापेमारी की. टीम ने गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव और माधव सिंह सहित अन्य के यहां भी छापेमारी की. टीम ने धनबाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को आधार बनाकर जांच शुरू की है. यह जांच झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और दाखिल चार्ज शीट को आधार बनाकर शुरू की गई है. पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि यह सिंडिकेट धनबाद और समीप के जिलों में अवैध कोयला खनन, तस्करी और अवैध कोयले का उठाव कर रहा है. पीएमएलए अधिनियम के तहत जांच में टीम को पता चला है कि उपरोक्त लोगों ने इस तरह के अपराध से बड़ी मात्रा में कमाई गई रकम जमा की थी. आरोपियों ने अवैध तरीके से अर्जित की गई राशि को वैध दिखाने के लिए कई संस्थानों ,शेल कंपनियों और लोगों का इस्तेमाल किया। फिर इसका उपयोग चल और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था.
ईडी ने बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा किया है.
इस छापेमारी में ईडी ने बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा किया है. छापेमारी खत्म होने के बाद ईडी द्वारा बताया गया है कि कोयला कारोबारी एलबी सिंह के म्युचुअल फंड में निवेश किए गए 160 करोड रुपए तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिए गए हैं. वहीं अन्य परिसरों से 1.02 करोड़ नगदी की जब्ती हुई है. सबसे बड़ी बात है कि जांच टीम को 200 से अधिक अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले है. यह अचल संपत्तियां कोयले के अवैध धंधे की कमाई से खरीदे जाने का भी संदेह है. इस बीच भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार जब्त दस्तावेज से कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते है. कई सफेदपोश भी इसमें शामिल बताये जाते है. जब्त दस्तावेज को टीम खंगाल रही है. सूत्र तो यह भी बता रहे है कि अचल प्रॉपर्टी के अधिकतर दस्तावेज दूसरों के नाम पर दर्ज है. अब जाँच टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि जिस समय प्रॉपर्टी की खरीदारी की गई ,उस समय उनके पास इसकी वित्तीय क्षमता थी अथवा नहीं।

