साइबर अपराधियों में धनबाद के सिविल सर्जन का फ़ोन पहले किया हैक, फिर कर दिया बड़ा खेल, आगे क्या हुआ, पढ़िए
धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा के WhatsApp का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर स्वास्थ्यकर्मियों से 4 लाख रुपये मांगे गए. समय रहते मामला सामने आने से ठगी टल गई.
धनबाद (DHANBAD): साइबर अपराधियों ने सोमवार को धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा को निशाना बनाकर ठगी की बड़ी कोशिश की. हालांकि समय रहते मामले का खुलासा हो गया और अपराधी अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके. बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने सिविल सर्जन के मोबाइल और WhatsApp अकाउंट को अपने कब्जे में लेकर उनके संपर्क में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया.
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 10 बजे सिविल सर्जन के मोबाइल पर एक कॉल आया. फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके कुछ जरूरी कागजात आने वाले हैं और उन्हें सही पते पर पहुंचाने के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी. चूंकि वास्तव में बैंक से कुछ दस्तावेज आने की जानकारी सिविल सर्जन को थी, इसलिए उन्हें फोन पर तुरंत संदेह नहीं हुआ.
कॉल करने वाले ने उन्हें एक मोबाइल नंबर पर संपर्क करने को कहा. सिविल सर्जन ने बताए गए नंबर पर बात की. इसके कुछ देर बाद ही उनके WhatsApp नंबर से जुड़े कई स्वास्थ्यकर्मियों को संदेश पहुंचने लगे.
मैसेज में कथित तौर पर बताया गया कि बीमारी की वजह से उन्हें तत्काल पैसों की जरूरत है और करीब चार लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी गई. अचानक सिविल सर्जन के नाम से पैसे मांगने वाला संदेश मिलने पर कुछ कर्मचारियों को शक हुआ. उन्होंने सीधे डॉ. आलोक विश्वकर्मा से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी. इसके बाद सिविल सर्जन को पता चला कि उनके WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल किसी और द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने मामले की जानकारी साइबर पुलिस को दी और शिकायत दर्ज कराई.
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. साइबर अपराधियों ने किस तरीके से मोबाइल या WhatsApp अकाउंट तक पहुंच बनाई और इस प्रयास के पीछे कौन लोग हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है. पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी परिचित या अधिकारी के नाम से पैसे मांगने वाला संदेश मिलने पर बिना पुष्टि किए रकम ट्रांसफर न करें.