निगम के नए पार्षद जान लें नियम! कौन से सवाल नहीं पूछ सकते, मेयर कब बुलाएंगे बैठक और निलंबन कैसे होगा खत्म?
धनबाद नगर निगम के तीसरी बार हुए चुनाव में संजीव सिंह मेयर चुने गए हैं. करीब 40% नए पार्षदों के सामने निगम की बैठकों, सवाल पूछने और नियमों के पालन से जुड़े कई अहम अधिकार और प्रक्रियाएं होंगी.
धनबाद (DHANBAD): धनबाद नगर निगम का 2006 में गठन होने के बाद तीसरी बार चुनाव हुआ है. तीसरी बार के चुनाव में संजीव सिंह निगम के मेयर चुने गए है. सबसे पहले 2010 में हुए चुनाव में श्रीमती इंदु देवी मेयर बनी थी. 2015 के चुनाव में शेखर अग्रवाल मेयर चुने गए थे. तीसरी बार संजीव सिंह मेयर चुने गए है. इस बार के चुनाव में लगभग 40% नए पार्षद चुनकर आए हैं. उनके लिए बहुत कुछ जानना जरूरी भी है.
इस संबंध में पूर्व पार्षद निर्मल कुमार मुखर्जी ने सरकार के संशोधित आदेश का हवाला देते हुए बताया है कि पार्षदों के प्रश्न पूछने के अधिकार को भी सुनिश्चित किया गया है. निर्मल मुखर्जी के अनुसार कोई नाम या ऐसा वक्तव्य नहीं दिया जाएगा, जो समय के अनुसार आवश्यक नहीं हो. व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति, आरोप, विशेषण या निंदात्मक वक्तव्य नहीं होना चाहिए. राय की अभिव्यक्ति अथवा काल्पनिक समस्या के निराकरण की मांग नहीं की जा सकती है. सार्वजनिक हैसियत के किसी भी व्यक्ति के चरित्र -आचरण के संबंध में पूछताछ नहीं की जा सकती.
ऐसा कोई मामला नहीं होगा, जो मुख्य रूप से निगम का विषय ना हो. निजी चरित्र का कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा. नीति विषयक इतने बड़े मामले नहीं उठाए जाएंगे, जिन्हें किसी प्रश्न के उत्तर की सीमा के भीतर निपटाया नहीं जा सके. ऐसे प्रश्नों को नहीं उठाया जा सकता, जिनका उत्तर पहले दे दिया गया हो अथवा जिनका उत्तर देने से इनकार किया गया हो. कोई मामला जो न्यायालय के निर्णय के अधीन हो, के संबंध में कोई जानकारी नहीं मांगी जा सकती है.
निर्मल मुखर्जी ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि मेयर जब भी सही समझे और पार्षदों की संख्या के पांचवें भाग के बराबर द्वारा लिखित रूप से मांग करने पर निगम की बैठक बुला सकते हैं. बैठक की तिथि निर्धारित करते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि बैठक अवकाश के दिन नहीं हो, लेकिन यदि आवश्यक कार्य के लिए अवकाश के दिन बैठक निर्धारित की जाती है, तो यह बैठक भी मान्य होगी.
पूर्व पार्षद के अनुसार यदि किसी पार्षद को दूसरी बार निकल जाने का आदेश दिया जाए, तो पीठासीन पदाधिकारी ऐसे अवधि के लिए नगर पालिका की बैठकों में भाग लेने से निलंबित कर सकेंगे और इस प्रकार निलंबित पार्षद अनुपस्थित रहेंगें. यह भी बताया गया है कि निलंबित पार्षद का निलंबन मेयर द्वारा किसी भी समय समाप्त किया जा सकता है. निलंबित पार्षद निगम की किसी समिति की किसी बैठक में भाग नहीं ले सकेंगें. यह अभी बताया गया है कि कार्य संचालन में किसी प्रकार का विरोधाभास, जिसका समाधान निगम स्तर पर संभव न हो उसे मार्गदर्शन के लिए सरकार को भेजा जाएगा, जिस पर नगर विकास एवं आवास विभाग अंतिम निर्णय लेगा.
पूर्व पार्षद ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई पार्षद लोक महत्व के किसी विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए सचिव को सूचना दे सकता है. लेकिन उठाए जाने वाले विषय का इसमें स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए. ऐसी सूचना, जिस पर कम से कम दो पार्षदों के हस्ताक्षर होंगे, सचिव को ऐसी तारीख से कम से कम 24 घंटे पहले दी जाएगी. जिस तारीख को ऐसा विचार विमर्श होना हो, सचिन इसे तत्काल महापौर के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और पार्षदों के बीच सूचना दी जाएगी. मेयर ऐसी सूचना, जो उन्हें पर्याप्त लोक महत्व का लगेगा, विचार विमर्श के लिए स्वीकार कर सकते हैं. वह विचार विमर्श के लिए समय निर्धारित कर सकते हैं, जैसा वह उपयुक्त समझे.
ऐसे विचार विमर्श पर कोई औपचारिक संकल्प या मतदान नहीं होगा. कोई पार्षद निगम प्रशासन से संबंध किसी आवश्यक मामले पर किसी दिन निगम की बैठक आरंभ होने के एक घंटा पहले सचिव को सूचना देकर समिति से विवरण की मांग कर सकता है. महापौर अथवा स्थाई समिति का कोई सदस्य इस दिन या तो संक्षिप्त वक्तव्य दे सकते हैं या ऐसा वक्तव्य देने के लिए तिथि निर्धारित कर सकते हैं. एक ही बैठक में दो से अधिक ऐसे मामले नहीं उठाए जाएंगे और दो से अधिक ऐसे मामलों को उठाने की स्थिति में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो महापौर की राय में आवश्यक और महत्वपूर्ण हो.