धनबाद(DHANBAD) : कोयले को फिलहाल "काला हीरा" कहा जाता है, लेकिन यह कोयला अब उससे भी आगे निकलेगा। आधा किलो, एक किलो कोयले का भी महत्व बढ़ेगा , यह कोयला अब एलपीजी का विकल्प भी तैयार करेगा। दरअसल, सूत्रों के अनुसार ऊर्जा संकट को देखते हुए कोयले से अब एलपीजी का विकल्प डाई मिथाइल ईथर और एविएशन फ्यूल बनाने का रोड मैप तैयार किया गया है. देश के तीन बड़े संस्थानों को जिम्मेवारी मिली है और इसके लिए काम तेज कर दिया गया है.
सिन गैस को अब डाई मिथाइल ईथर और एवियशन फ्यूल में बदला जाएगा
जानकारी के अनुसार कोयले से तैयार सिन गैस को अब डाई मिथाइल ईथर और एवियशन फ्यूल में बदला जाएगा. केंद्र की मदद से बहुत जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा. इस अभियान में धनबाद की बड़ी भूमिका होगी. बता दें कि पहले से ही कोल् गैसीफिकेशन का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है. जानकार बताते हैं कि डाई मिथाइल ईथर के गुण एलपीजी से काफी मिलते-जुलते हैं. इसे स्वतंत्र रूप से भी एलपीजी जैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एलपीजी में 20% मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है. दरअसल, भारत में कोयले का पर्याप्त भंडार है.
कोयला उद्योग बदलाव की ओर बढ़ चला है
उल्लेखनीय है कि कोयला उद्योग बदलाव की ओर बढ़ चला है. हाल के दिनों में कई बदलाव देखे जा सकते हैं. कोयले की खदानों से गैस निकलेगी. दरअसल, जिन कोलियारियों में कोयला बहुत नीचे पहुंच गया है और अब उसे निकालना आसान भी नहीं है और प्रक्रिया भी महंगी है, तो इस कोयले से सीधे गैस बनाई जाएगी. कोल इंडिया ने भी भविष्य में कोयले के बेहतर उपयोग को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. कोल इंडिया तीन प्रमुख पीएसयू के साथ तीन बड़े गैसीकरण प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है. जानकारी के अनुसार जिन तीन पीएसयू के साथ कोल इंडिया का पूर्व में मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग हुआ है, उनमें गेल, भेल और बीपीसीएल शामिल है. इन पीएसयू के साथ ज्वाइंट वेंचर में काम आगे बढ़ चुका है. दरअसल, पश्चिम एशिया संकट ने भारत के सामने ऊर्जा की चुनौतियां खड़ी कर दी है. उससे निपटने के लिए अलग-अलग प्रयास किये जा रहे हैं.