धनबाद (DHANBAD): धनबाद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान निरीक्षण के लिए पहुंचे धनबाद अंचल अधिकारी (सीओ) रामप्रवेश सिंह पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ अभद्र व्यवहार करने और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा. आरोप है कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने बीएलओ की वेशभूषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए "भिखारियों वाली ड्रेस पहनकर काम कर रहे हैं" जैसी बात कही. इस टिप्पणी से नाराज बीएलओ ने मौके पर ही एसआईआर कार्य का बहिष्कार कर दिया और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए.
घटना गुरुवार को धनबाद अंचल के बरमसिया स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय में हुई, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण और संग्रहण किया जा रहा था. इसी दौरान निरीक्षण के लिए पहुंचे सीओ के कथित व्यवहार से वहां मौजूद महिला और पुरुष बीएलओ आक्रोशित हो गए. उनका कहना है कि वे सीमित संसाधनों के बावजूद पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वाचन आयोग का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें सम्मान के बजाय अपमान झेलना पड़ रहा है.
पीड़ित बीएलओ मीरा कुमारी ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्य कर रही हैं और निर्वाचन ड्यूटी भी पूरी निष्ठा से निभाती रही हैं. उन्होंने कहा कि आज तक जिला प्रशासन की ओर से न तो कोई आधिकारिक ड्रेस, न पहचान पत्र और न ही टोपी उपलब्ध कराई गई. इसके बावजूद उन पर ड्रेस को लेकर टिप्पणी करना बेहद अपमानजनक है. उनका कहना है कि यदि कार्य में कोई कमी होती तो कार्रवाई स्वीकार थी, लेकिन बिना किसी गलती के सार्वजनिक रूप से अपमानित करना मानसिक प्रताड़ना है.
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब बीएलओ-2 के रूप में कार्य कर रहे पूर्व पार्षद मदन महतो भी प्रदर्शन में शामिल हो गए. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने बीएलओ को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए बिना उनसे लगातार चुनावी कार्य लिया जाता है. ऐसे में महिला कर्मियों के साथ इस तरह की भाषा का प्रयोग पूरी तरह अनुचित है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
घटना के दौरान अपने मतदाता प्रपत्र जमा करने पहुंचे कई स्थानीय नागरिक भी बीएलओ के समर्थन में नजर आए. उनका कहना था कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगे कर्मियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
फिलहाल बीएलओ अपने सम्मान और न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं. एसआईआर अभियान के बीच उत्पन्न इस विवाद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजर जिला प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मामले की जांच किस तरह करता है और आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है. वहीं, इस विवाद का असर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की गति पर भी पड़ सकता है, यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं निकाला गया.
रिपोर्ट : नीरज कुमार

