भारत में जल्द दिखेंगे चमकदार प्लास्टिक नोट, RBI कर रहा तैयारी
भारत में जल्द ही पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों की शुरुआत हो सकती है. RBI की बैठकों में इन नोटों की व्यवहारिकता, सुरक्षा और टिकाऊपन को लेकर चर्चा तेज हो गई है....
Read Nowधनबाद(DHANBAD): देश का कोयला उद्योग बदलाव की रफ़्तार पकड़ लिया है. तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है. प्राइवेट प्लेयर्स भी प्रवेश कर रहे हैं. इससे कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड को भी चुनौती मिल रही है. कोल इंडिया कंपनी को अपना अस्तित्व बचाने के लिए लगातार बदलाव करने पड़ रहे है. तकनीक कि इस दुनिया में अब मैन्युअल काम बीते दिनों की बात होती जा रही है. जानकारी के अनुसार कोयला ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आने वाला है. खदानों से निकलने वाला कोयला अब ट्रक पर लोड नहीं होगा। लोडिंग के लिए आपाधापी भी नहीं होगी।
13 एफएमसी परियोजनाओं की होगी शुरुआत
सीधे कोयला कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से रेलवे तक पहुंचेगा। सूत्र बता रहे हैं कि कोल् इंडिया लिमिटेड ने फर्स्ट कनेक्टिविटी कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर दिया है . सूत्र बता रहे हैं कि वित्तीय वर्ष 26 -27 में 131 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली 13 एफएमसी परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. बड़ी बात है कि इसमें झारखंड और कई महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र शामिल किये गए हैं. जानकारी के अनुसार 24 मई को नई दिल्ली में एफएमसी परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में केंद्रीय कोयला मंत्री ने लंबित परियोजनाओं के लिए काम तेज करने का निर्देश दिया है.
खदान का कोयला सीधे रेलवे नेटवर्क तक पहुंच जाएगा
इन परियोजनाओं के शुरू हो जाने से खदान से निकलने वाला कोयला सीधे यांत्रिक व्यवस्था से रेलवे नेटवर्क तक पहुंच जाएगा। इसके लिए कन्वेयर बेल्ट, क्रेशर, साइलो और रेलवे साइडिंग सिस्टम विकसित किये जाएंगे। फिलहाल कई क्षेत्रों में कोयला ट्रको से रेलवे साइडिंग तक पहुंचाया जाता है. इससे सड़क पर भी दबाव बढ़ता है और प्रदूषण भी बढ़ता है. झारखंड के कोयला क्षेत्र को भी इन परियोजनाओं में शामिल किया गया है. झरिया कोयलांचल में भी अब व्यवस्था लागू होगी। इस व्यवस्था से कोयला उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि खदान के भीतर से कोयला तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा। इससे परिवहन लागत में भी कमी आएगी। खदानों के भीतर कोयले का ढेर भी कम होगा, प्रोडक्शन और ट्रांसपोर्टिंग क्षमता भी बढ़ेगी।