BCCL की E-ब्लॉक मेगा परियोजना से क्यों मचा कोयलांचल में हलचल? बैठक में दी गई बड़ी चेतावनी

धनबाद में BCCL की प्रस्तावित E-ब्लॉक मेगा कोल परियोजना को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट से हजारों परिवार और कतरास-बाघमारा का बड़ा इलाका प्रभावित हो सकता है.

BCCL की E-ब्लॉक मेगा परियोजना से क्यों मचा कोयलांचल में हलचल? बैठक में दी गई बड़ी चेतावनी

धनबाद (DHANBAD): बीसीसीएल की प्रस्तावित E-ब्लॉक मेगा प्रोजेक्ट ने कोयलांचल में बड़ा हलचल पैदा कर दिया है. बीसीसीएल की इस परियोजना से बड़ा इलाका प्रभावित हो सकता है. क्रमिक विकास मंच के बैनर तले आंदोलन की घोषणा की गई है. सूचना के मुताबिक कतरास के जलाराम हॉल स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में एक बड़ी बैठक हुई है. इस बैठक में भारी संख्या में लोग पहुंचे थे. कहा तो यह भी जा रहा है कि परिसर ही छोटा पड़ गया. लोगों ने कहा कि कतरास के ऐतिहासिक ताने-बाने को खत्म करने की साजिश की जा रही है. हजारों परिवारों के आशियाने उजड़ जाएंगें।  लोगों ने कहा कि यदि खनन करना जरूरी है, तो इसके लिए जनता द्वारा दिए गए विकल्प पर मैनेजमेंट को विचार करना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो लोग  चुप नहीं बैठेंगें.

बता दें कि BCCL की प्रस्तावित ई ब्लॉक मेगा कोल् प्रोजेक्ट की चर्चा जैसे-जैसे बढ़ रही है, कोयलांचल में हलचल दिखने लगी है. इस प्रोजेक्ट में गोधर से लेकर कतरास-बाघमारा तक की आबादी प्रभावित हो सकती है. लाखों लोग इसकी जद में आ सकते हैं. यह बीसीसीएल का बड़ा प्रोजेक्ट है और बीसीसीएल की आधा दर्जन कोलियरियाँ इसमें शामिल हो सकती हैं. चुकि बड़ी आबादी प्रभावित होने का खतरा है, इसलिए सवाल भी उठने लगे है, आगे भी उठेंगे. योजना के प्रस्ताव के अनुसार इस मेगा कोल परियोजना में कतरास, सिजुआ एवं कुसुंडा कोयला क्षेत्र की मौजूदा खदानों एवं परियोजनाओं को शामिल किया जाना है. 

जानकारी के अनुसार इसमें आकाशकिनारी, मोदीडीह, तेतुलमारी, सेंद्रा बांस जोड़ा, निचितपुर, ईस्ट बसुरिया, गजाली टांड़, खास कुसुंडा, बसुरिया, गोंदू डीह के हिस्से शामिल किए जा सकते हैं. परियोजना लगभग 27 वर्षों के लिए प्रस्तावित है. परियोजना का खनन क्षेत्र लगभग 18.18 वर्ग किलोमीटर किया जा सकता है. योजना के मुताबिक प्रतिवर्ष 15 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है. परियोजना में लगभग 1930 हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई है. जिसमें लगभग 1361 हेक्टेयर भूमि बीसीसीएल के पास है. बाकी जमीन अधिग्रहित करनी होगी. 

इस सम्बन्ध में कांग्रेस प्रदेश महासचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा है कि हम विकास और कोयला उत्पादन के विरोधी नहीं है. हमारी चिंता विकास के साथ-साथ न्याय की है. यह परियोजना लाखों लोगों के घर जमीन, रोजगार, व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान और आने वाली पीढ़ियां के भविष्य से भी जुड़ा है. धनबाद नगर निगम के 12, 13 वार्ड प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से खनन क्षेत्र में आ सकते हैं. इन क्षेत्रों में केवल आवासीय बस्तियां ही नहीं हैं, बल्कि सरकारी एवं निजी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्र, बाजार, दुकान एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठान, मंदिर, मस्जिद एवं अन्य धार्मिक स्थल, शमशान घाट, कब्रिस्तान, जलापूर्ति, बिजली की लाइनें तथा अन्य सार्वजनिक एवं सामुदायिक संरचना भी मौजूद हैं. 

लाखों लोगों की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रोजी-रोटी, स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय, परिवहन, मजदूरी एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था इस पूरे क्षेत्र से जुड़ी हुई है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव अशोक कुमार सिंह ने कोयला मंत्रालय से लेकर बीसीसीएल के सीएमडी तक को पत्र लिखकर यह मांग की है कि इस प्रस्तावित परियोजना का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए. अगर प्रोजेक्ट चलाना जरूरी ही है, तो कम से कम उस इलाके में जितनी आबादी रहती है और जिस ढंग से रहती है, उसके लिए एक अलग शहर बसाया जाए. क्योंकि इस प्रोजेक्ट से गरीब से लेकर अमीर तक प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने पूरे इलाके का डोर टू डोर सोशियो इकोनामिक सर्वे कराने की भी मांग की है. 

ऐसे परिवारों, जिनके पास जमीन के मालिक होने का दस्तावेज नहीं है, लेकिन वह वर्षों से रह रहे हैं, उनके बारे में क्या निर्णय लिया जाएगा, यह स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए? पहले पुनर्वास, उसके बाद विस्थापन की बात होनी चाहिए.  कंपनी मैनेजमेंट को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर आम जनता की राय  के लिए संगोष्ठी आयोजित करे. उसमें मुद्दे को लेकर व्यापक जनसुनवाई एवं जनसंवाद हो, प्रभावित क्षेत्र के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी, निगम के प्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों की भागीदारी इसमें सुनिश्चित की जाए. जो भी निष्कर्ष निकलते हो, उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाए.