Dhanbad : तो क्या बीसीसीएल मैनेजमेंट पर सीवीओ की गाज गिर सकती है? क्यों कोल इंडिया में बीसीसीएल की ही सबसे अधिक चर्चा है? आखिर क्यों संवेदनशील पदों पर अधिकारी और कर्मचारियों को नहीं बदला गया है? इन सब सवालों का जवाब अब मैनेजमेंट को देना होगा। कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल में हलचल बढ़ी हुई है. हलचल ट्रांसफर को लेकर है.
बीसीसीएल में 614 पदों में से केवल 86 पर ही किये ट्रांसफर
सूत्र बताते हैं कि बीसीसीएल में ट्रांसफर रोटेशन के लिए चिन्हित 614 पदों में से केवल 86 पर ही ट्रांसफर किए गए है. 528 मामले अभी भी पेंडिंग हैं. इस बात को गंभीर मानते हुए कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ ) ने नाराजगी जताई है. उन्होंने मैनेजमेंट को इससे जुड़े विस्तृत फीडबैक देने का निर्देश दिया है. यह चर्चा जोरो पर है कि सीवीओ की नाराजगी के बाद बड़े पैमाने पर तबादले हो सकते हैं. सीवीओ ने फर्स्ट क्वार्टर के समीक्षा बैठक में सभी अनुषंगी कंपनियों के संवेदनशील पदों पर रोटेशन और सतर्कता संबंधी व्यवस्था की समीक्षा की थी. उन्होंने सभी कंपनियों के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया था. समीक्षा के दौरान बीसीसीएल के 528 लंबित मामलों पर विशेष चर्चा हुई थी.
सीसीएल का परफॉर्मेंस बहुत बेहतर पाया गया है
सूत्र बताते हैं कि समीक्षा में सीसीएल का परफॉर्मेंस बेहतर पाया गया है. कंपनी में रोटेशन के लिए 252 पद चिन्हित थे. जिनमें से 250 पर तबादले कर दिए गए है. केवल दो मामले लंबित हैं. वहीं ईसीएल में 264 पदों में से 166 पर रोटेशन कर दिया गया है. जबकि 91 मामले अभी भी लंबित है, सीसीएल में 139 में से 46, एनसीएल में 275 में से 260, एसईसीएल में 403 में से 316 तथा डब्लूसीएल में 288 में से 217 पदों पर रोटेशन किया गया है. दरअसल कोल् इंडिया में संवेदनशील पद वह माने जाते हैं, जहां वित्तीय, खरीद, ठेका , उत्पादन, स्टोर, क्वालिटी कंट्रोल, सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं. सतर्कता दिशा- निर्देश के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को लंबे समय तक एक ही संवेदनशील पद पर नहीं रखा जा सकता है. निर्धारित अवधि पूरी होने पर उनका स्थानांतरण किया जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे. बीसीसीएल में 528 मामले लंबित होने की वजह से यह मामला कोल इंडिया स्तर पर पहुंच गया हैं.

