बीसीसीएल: आउट सोर्स कंपनियों पर शिकंजा, अब उत्पादन-डिस्पैच में जुर्माने का भुगतान नहीं करेगी कंपनी 

बीसीसीएल: आउट सोर्स कंपनियों पर शिकंजा, अब उत्पादन-डिस्पैच में जुर्माने का भुगतान नहीं करेगी कंपनी

धनबाद (DHANBAD): बीसीसीएल ने आउटसोर्स कंपनियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. एन आई टी को नहीं मानने वाली आउट सोर्स कंपनियों की मनमानी अब नहींचलेगी. बीसीसीएल , एनआईटी के अलावे भी जो छोटी-मोती सुविधाएं देती थी, उसे वापस करना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में कोयले की खराब गुणवत्ता और रैक लोडिंग में देरी होने पर लगने वाले जुर्माने की वसूली अब आउटसोर्स कंपनियों से की जाएगी. अभी तक यह भुगतान कंपनी स्तर पर होता था. अब जितना डैमरेज  लगेगा, उसकी पूरी रिकवरी आउटसोर्स कंपनियों से की जाएगी. दरअसल, भेजे जाने वाले कोयले की गुणवत्ता कई बार एग्रीमेंट के अनुसार नहीं होती. कई बार कोयला भी उपलब्ध नहीं होता. ऐसी स्थिति में वाशरी और रेलवे द्वारा जुर्माना लगाया जाता है. लेकिन अब वाशरियो को कोयला भेजने वाली आउटसोर्स कंपनी और साइडिंग पर कोयला पहुंचने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी से इसकी वसूली की जाएगी.

पहले ही कंपनी को दिया गया था सुझाव 

बताया जाता है कि तत्कालीन मुख्य सतर्कता अधिकारी ने डैमेज से जुड़ी फाइलों को देखने के बाद कंपनी मैनेजमेंट को संबंधित एजेंसियों से डैमेज वसूलने का सुझाव दिया था. अब उसका अनुपालन शुरू किया जा रहा है. दरअसल, बीसीसीएल पर कोयला मंत्रालय से लेकर कोल् इंडिया मैनेजमेंट का भारी  दवाब है. इस बीच बताया जाता है कि बीसीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों से रेलवे ट्रैक में कोयला अंडर लोडिंग की जा रही है. इससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक बीसीसीएल को एक महीने में 2 करोड़ से अधिक का पेनल्टी रेलवे को भुगतान करना पड़ा है. इसके बाद आउट सोर्स कंपनियों के उत्पादन दावे पर भी सवाल उठाने लगे है.  

अंडरलोडिंग से भी कंपनी को होता है नुकसान

आखिर किन वजहों से अंडरलोडिंग हो रही है, यह पता लगाना कंपनी की प्राथमिक सूची में आ गई है. यह बात भी सच है कि बीसीसीएल में कोयले का उत्पादन आउटसोर्स कंपनियों के भरोसे होता है. तो क्या जितना कोयला उत्पादन का दावा किया जाता है, उतना उत्पादन होता नहीं है अथवा तकनीकी कारणों से रेलवे ट्रैक में अंडरलोडिंग हो रही है. दरअसल, रेलवे प्रत्येक वैगन और रैक के लिए एक निश्चित क्षमता तय करता है. जब किसी रैक  में निर्धारित क्षमता से कम कोयला भेजा जाता है, तो रेलवे इसे अंडरलोडिंग मानता है और इसके एवज में कंपनी से शुल्क वसूलता है. यदि निर्धारित मात्रा से कम कोयला भरकर रेलवे रैक भेजा जाता है, तो रेलवे की परिवहन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता. ऐसे में रेलवे के नियमों के अनुसार कंपनी को अंडरलोडिंग चार्ज देना पड़ता है. अप्रैल महीने में बीसीसीएल को 2.23 करोड रुपए भुगतान करना पड़ा है.इसके अलावा रैक खड़े रहते है, लेकिन कोयला लोड नहीं होता, यही सब वाशरी में भी होता है.