बैंक हड़ताल : अधिकारी-कर्मचारी आर-पार के मूड में, कोई पीछे हटने को तैयार नहीं, आखिर अब होगा क्या ?

धनबाद समेत झारखंड में बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल का असर दिखा. पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, PLI और लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों ने विरोध जताया.

बैंक हड़ताल : अधिकारी-कर्मचारी आर-पार के मूड में, कोई पीछे हटने को तैयार नहीं, आखिर अब होगा क्या ?

धनबाद (DHANBAD): दिन रविवार का था लेकिन बैंक के ताले खुले हुए थे. रोज के बजाय अधिक भीड़ थी. कर्मचारी-अधिकारी भी परेशान थे. धनबाद के बैंकों में खास बात यह देखने को मिली कि बैंक अधिकारी और कर्मचारी काला कपड़ा पहनकर बैंक पहुंचे थे. सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी काली ड्रेस में पहुंची थी. पूछने पर कर्मचारी कहते कि सरकार हम लोगों को दोयम दर्जा का मानती है. इसलिए विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है. बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल का असर धनबाद समेत झारखंड में भी देखने को मिला.

राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं 

यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) के कहने पर राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए हैं. इसके कारण बैंक शाखाओं में रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है। पैसा जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, पासबुक अपडेट और दूसरी बैंक में जाकर काम करने के संबंध में ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में कई लोग बैंक पहुंच रहे हैं और ताला लटका देखा मायूस होकर लौट रहे हैं. हड़ताल करने का सबसे मुख्य बड़ा करण सप्ताह में 5 दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है. बैंक यूनियनों का कहना है कि बैंक कर्मचारियों के लिए सोमवार से शुक्रवार तक काम और शनिवार रविवार अवकाश की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.

पांच दिनों का कार्यदिवस चाहते हैं अधिकारी-कर्मचारी 

यूनियनों के मुताबिक मार्च 2024 में भारतीय बैंक संघ के साथ हुए समझौते में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है. दूसरा मुख्य कारण PLI व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी है. कर्मचारी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं. यूनियन का आरोप है कि  मौजूदा ढांचा सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए समान नहीं है. उनकी मांग है कि PLI को बैंक के समग्र प्रदर्शन से जोड़ा जाए और इसके नियमों को कर्मचारियों के संगठनों के साथ बातचीत करके तय किया जाए. इसके अलावा वेतन, पेंशन और कर्मचारियों से जुड़े दूसरे लंबित मामलों के समाधान की मांग भी आंदोलन का  मुख्य कारण है.

आंदोलन की वजह से ग्राहक झेल रहे परेशानी 

हड़ताल के दौरान मुख्य रूप से ब्रांच स्तर की सेवाएं प्रभावित हुई हैं. बैंक अकाउंट पर नगद जमा या निकासी चेक संबंधी काम, पासबुक अपडेट, KYC, दस्तावेज जमा करने और कुछ ऋण संबंधी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है. क्लीयरिंग और बैक ऑफिस से जुड़े काम भी प्रभावित होने की संभावना है. हालांकि UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सुविधा सामान्य तौर पर उपलब्ध हैं और चल रही है. 11 सितंबर की हड़ताल के बाद बैंक कर्मचारियों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. यूनियनों के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को 3 दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का भी ऐलान किया है. यह समय बैंकों के अर्धवार्षिक वित्तीय समापन से जुड़ा होने के कारण बैंकिंग कामकाज पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है. यूनियनों की ओर से मांगे पूरी नहीं होने से 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है.