दिलचस्प कहानी: एक साथ जमसं (बच्चा गुट), कांग्रेस और झामुमो को कैसे बैकफुट पर लाया एफसीआई सिंदरी मैनेजमेंट, पढ़िए 

सिंदरी में एफसीआई प्रबंधन ने कब्जे के विवाद के बीच पुराने विद्युत सब स्टेशन भवन को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया.या है.

दिलचस्प कहानी: एक साथ जमसं (बच्चा गुट), कांग्रेस और झामुमो को कैसे बैकफुट पर लाया एफसीआई सिंदरी मैनेजमेंट, पढ़िए

धनबाद (DHANBAD): कहने के लिए तो सिंदरी में एफसीआई प्रबंधन ने एक पुराने विद्युत सब स्टेशन की बिल्डिंग को ध्वस्त किया है. लेकिन इसके पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है. राजनीतिक दल और मजदूर संगठन के बीच की लड़ाई की वजह से भवन का अस्तित्व ही अब खत्म हो गया. प्रबंधन ने राजनीतिक दलों और यूनियन के बीच कब्जे के विवाद को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया. जानकारी के अनुसार एफसीआई प्रबंधन ने जेसीबी लगाकर पूरे सब स्टेशन भवन को ध्वस्त कर दिया है.  

इस भवन पर कब्जे के लिए कई गुट  के लोग कोशिश कर रहे थे. हालात बिगड़ रहे थे. प्रबंधन ने इसकी सूचना मुख्यालय को दी. उसके बाद मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद भवन के अस्तित्व को ही खत्म कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार सिंदरी में नई विद्युत ट्रांसमिशन सिस्टम लागू होने के बाद एफसीआई प्रबंधन ने इस सब स्टेशन के सभी कीमती सामान निकाल कर अपने कब्जे में ले लिया था. भवन खाली होने के बाद पहले कांग्रेस सिंदरी नगर कमेटी ने वहां अपना झंडा और बैनर लगाकर ताला जड़ दिया और इसे पार्टी का कार्यालय घोषित कर दिया. उसी दिन रात को झामुमो कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी का स्टिकर और ताला लगाकर झामुमो कार्यालय की घोषणा कर दी. यह विवाद यही नहीं थमा, जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) ने भी सब स्टेशन पर यूनियन का बैनर टांग कर अपना ताला लगा दिया और इसे अपना कार्यालय बताने लगे. 

एक ही भवन पर तीन गुटों के दावे के बाद एफसीआई प्रबंधन सक्रिय हुआ. इसके बाद इसकी सूचना मुख्यालय सहित जिला प्रशासन को दी गई. पुलिस ने भी पहुंचकर सबों को अपना-अपना झंडा, बैनर हटाने का आदेश दिया. उसके बाद दिल्ली मुख्यालय से जारी आदेश के बाद इसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया. मतलब न कांग्रेस का रहा. झामुमो का और न जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) का. दरअसल, सिंदरी में खाली भवन पर कब्जे की होड़ मची रहती है. हाल के दिनों में प्रबंधन ने अवैध कब्जाधारी को रेगुलराइज करने के के लिए रेट फिक्सेशन का तरीका अपनाया है. लेकिन दर को लेकर विवाद है. दरअसल, 2002 में सिंदरी कारखाना बंद होने के बाद सिंदरी अब उजाड़ सी लगती है. यह अलग बात है कि सिंदरी में हर्ल कंपनी चालू है, लेकिन खाद कारखाना वाली स्थिति सिंदरी में नहीं है.