धनबाद(DHANBAD): परंपरा और नियम टूटेंगे और कोल इंडिया लिमिटेड में वेतन समझौता अब नई व्यवस्था के अनुसार ही होगी, यह अब बात लगभग स्पष्ट हो चुकी है. हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं हो रही है , लेकिन बात अब आगे बढ़ चुकी है. जानकारी के अनुसार 26 जून को कोल् इंडिया मुख्यालय में सभी सहायक कंपनियों के कार्मिक निदेशक की उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लगभग हो चुका है कि नए वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू करने से पहले औद्योगिक संबंध नियम 2026 के तहत गुप्त मतदान से वार्ताकार यूनियन अथवा वार्ताकार काउंसिल की मान्यता सुनिश्चित कराई जाएगी। निर्णय यह भी हुआ है कि इसके लिए मुख्य श्रम आयुक्त से वेरिफिकेशन अधिकारी की नियुक्ति का अनुरोध किया जाएगा.
5 जून को एपेक्स जेसीसी की बैठक में बहुत कुछ हो गया था साफ़
बैठक में इस बात की भी चर्चा हुई कि 5 जून को एपेक्स जेसीसी की बैठक में ट्रेड यूनियन के नेताओं को नए कानूनी प्रावधानों की जानकारी पहले ही दे दी गई थी. प्रबंधन मानकर चल रहा है कि नई लेबर कोड के लागू होने के बाद औद्योगिक संबंध का ढांचा बिल्कुल बदल गया है. इसलिए भविष्य का वेतन समझौता भी इसी के अनुसार होगा। अधिकारियों का मानना है कि औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 96 के तहत कोल इंडिया में छूट मिलने की संभावना बहुत कम है. यदि प्रस्तावित प्रक्रिया लागू हो गई तो कोल इंडिया के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब गुप्त मतदान के आधार पर वार्ताकार यूनियन अथवा वार्ताकार काउंसिल की मान्यता तय होगी. इसके बाद इस मान्यता प्राप्त यूनियन या काउंसिल के साथ ही आगे वेतन समझौता पर वार्ता होगी.
मजदूर संगठनों के डिमांड पर नहीं होने जा रही कोई पहल
सूत्र बताते हैं की बैठक में ट्रेड यूनियन नेताओं की आपत्तियों पर भी चर्चा की गई. लगभग यह तय किया गया कि औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 96 के तहत कोल इंडिया में छूट दिए जाने के पर्याप्त कानूनी आधार उपलब्ध नहीं हैं. दूसरी ओर यूनियनों ने सवाल उठाए थे कि कोल् इंडिया में पहले से प्रभावी द्विपक्षीय व्यवस्था लागू है. इसलिए औद्योगिक संबंध संहिता 2020 की धारा 96 के तहत छूट मिलनी चाहिए. मुख्यालय, सहायक कंपनियों , एरिया और सब एरिया वाले ढांचे में एक समान वार्ताकार यूनिट तय करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है. कोई भी यूनियन आवश्यक समर्थन, प्रतिशत हासिल नहीं कर पाएगी, जिससे कि वार्ताकार यूनिट या काउंसिल का गठन प्रभावित हो सकता है. अन्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में भी लेबर कोड अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है. औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के कुछ प्रावधानों में संशोधन की संभावना जताई गई है. उल्लेखनीय है कि यूनियन इसका विरोध कर रही है यह बात तो सच है कि अगर चार लेबर कोर्ट लागू हुआ तो कोल इंडिया में यूनियनों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है

