झारखंड की रिसर्चर्स टीम का कमाल: RO का पानी अब नहीं होगा बर्बाद, क्यों मिला भारतीय पेटेंट, पढ़िए

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के रिसर्चर्स ने आरओ रिजेक्ट वाटर को दोबारा इस्तेमाल करने वाली नई तकनीक विकसित की है, जिसे भारतीय पेटेंट भी मिल गया है.

झारखंड की रिसर्चर्स टीम का कमाल: RO का पानी अब नहीं होगा बर्बाद, क्यों मिला भारतीय पेटेंट, पढ़िए

धनबाद (DHANBAD): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद के रिसर्चर्स की टीम ने एक ऐसा इनबिल्ट रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) फिल्टर विद कॉन्सन्ट्रेट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है, जिसका उद्देश्य आरओ से पानी को साफ करने के दौरान होने वाली पानी की बर्बादी को कम करना और बचे हुए पानी का दोबारा इस्तेमाल करना है. इस टेक्नोलॉजी को भारतीय पेटेंट मिला है. इसका पेटेंट नंबर 593495 और एप्लीकेशन नंबर 202531036943 है. आईआईटी (आईएसएम) धनबाद इस पेटेंट का पेटेंटी है. 

इस टेक्नोलॉजी को विकसित करने वाली रिसर्च टीम में प्रो. विवेक बाजपेयी, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद; डॉ. पवन कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद; डॉ. माधव रIतूड़ी, जो रिसर्च के दौरान पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो थे और वर्तमान में एसआईटी पुणे में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, तथा प्रिंस आनंद, रिसर्च स्कॉलर शामिल हैं.

आसान भाषा में समझें तो इस सिस्टम में आरओ मशीन को अलग से लगाने के बजाय मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में पहले से मौजूद वाटर सप्लाई पाइपलाइन के साथ ही जोड़ दिया जाता है. पंप के जरिए पानी दबाव के साथ आरओ यूनिट तक पहुंचता है. साथ ही बिल्डिंग की ऊंचाई के कारण पाइपलाइन में मौजूद पानी का दबाव भी आरओ फिल्ट्रेशन में मदद करता है. आरओ मेम्ब्रेन पानी को दो हिस्सों में बांटती है. एक हिस्सा फिल्टर होकर साफ पानी के रूप में मिलता है, जिसे पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि दूसरा हिस्सा रिजेक्ट वाटर होता हैं. 

आम आरओ सिस्टम में यह रिजेक्ट वाटर अक्सर बेकार चला जाता है. आईआईटी (आईएसएम) की इस टेक्नोलॉजी में इसे बेकार नहीं जाने दिया जाता, बल्कि इसी वाटर सप्लाई सिस्टम के जरिए इसे रूफटॉप टैंक में जमा किया जाता है. बाद में इस पानी का इस्तेमाल सफाई, कपड़े धोने और दूसरे घरेलू कामों में किया जा सकता है. 

यह टेक्नोलॉजी खास तौर पर पानी की बर्बादी कम करने, आरओ रिजेक्ट वाटर को दोबारा इस्तेमाल करने और मौजूदा वाटर सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन देती है.  इससे मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में पीने के पानी की प्यूरिफिकेशन के साथ-साथ पानी के बेहतर मैनेजमेंट को भी बढ़ावा मिल सकता है.