बरवाअड्डा थाना विवाद में बड़ा अपडेट, जयराम महतो को बुलाने वाले JLKM नेता पर गिरी गाज, पार्टी से क्यों किये गए निष्काषित?

बरवाअड्डा थाना विवाद में JLKM ने बड़ा एक्शन लेते हुए जयराम महतो को बिना जिला समिति की सूचना के थाना बुलाने वाले नेता दिलीप चौधरी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है.

बरवाअड्डा थाना विवाद में बड़ा अपडेट, जयराम महतो को बुलाने वाले JLKM नेता पर गिरी गाज, पार्टी से क्यों किये गए निष्काषित?

धनबाद (DHANBAD): झारखंड की राजनीति में तहलका मचाने वाले बरवाअड्डा थाना विवाद में एक बड़ा ट्विस्ट सामने आया है. विधायक जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने अब इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी जानने  की कोशिश में लग गई है. विवाद को बढ़ाने वाले पार्टी के लोगों को चिन्हित करने और एक्शन लेने का काम शुरू कर दिया गया है. पार्टी ने भी सख्त रूप अख्तियार कर लिया है. विधायक जयराम महतो को बिना जिला समिति को सूचना दिए बरवाअड्डा थाना परिसर में बुलाने के मामले में पार्टी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.  

सूचना के मुताबिक पार्टी ने बरवाअड्डा के दिलीप चौधरी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है. उनपर आरोप है कि झूठी सूचना विधायक तक पहुंचाई, पार्टी के प्रधान महासचिव फरजान खान के हस्ताक्षर से दिलीप चौधरी को जारी पत्र में कहा गया है कि बरवाअड्डा थाना से संबंधित प्रकरण में आपके द्वारा माननीय विधायक जी को बिना जिला इकाई को सूचित किये, थाना बुलाने की पहल को केंद्रीय नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है. नियमानुसार थाना स्तर के मामले का निष्पादन जिला इकाई के माध्यम से किया जाना चाहिए था. 

आपने बिना किसी आधिकारिक सूचना के माननीय विधायक जी को बुलाया, जो कि संगठन में अनुशासनहीनता है और पार्टी की छवि के प्रतिकूल है. अतः पार्टी के संविधान के अनुसार आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी की  प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जाता है और निर्देशित किया जाता है कि आप पार्टी के किसी भी कार्यक्रम, बैठक अथवा राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेंगें।  

उल्लेखनीय है कि 21 अगस्त को बरवाअड्डा थाने में हुए हंगामा और थाना प्रभारी से कथित "हॉट टॉक" को लेकर पूरे झारखंड की राजनीति गरमाई हुई है. विधायक और पुलिस संगठन में ठन गई है. पुलिस अधिकारियों में विधायक के खिलाफ नाराजगी है, तो विधायक समर्थकों में पुलिस के प्रति आक्रोश है. दरअसल, आरोप  है कि दिलीप चौधरी ने ही विधायक को लाइव आकर थाने में बुलाया और हंगामा हुआ. 21 अगस्त का हंगामा सियासी रंग ले लिया है. 

बड़ा पिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी और जेएलकेएम नेता गणेश दास के बीच फर्जी हस्ताक्षर पर प्रमाण पत्र बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था. पुलिस ने गणेश दास को हिरासत में लिया और उसके बाद विवाद हुआ और मामला सियासी रंग पकड़ लिया. आरोप है कि दिलीप चौधरी ने फेसबुक लाइव के जरिए पुलिस पर मारपीट की अफवाह फैलाई, इसके बाद थाने के बाहर भारी भीड़ जुट गई. स्थिति तब और बिगड़ गई जब स्थानीय संगठन को सूचना दिए बिना विधायक जयराम महतो को थाना बुला लिया गया. 

थाने के भीतर दोनों पक्षों में तीखी झड़प हुई और हंगामा हुआ. पुलिस को हंगामे को "कंट्रोल" करने में कड़ी मिहनत करनी पड़ी. इस मामले में विधायक जय राम महतो सहित अन्य के खिलाफ दो मुकदमे और मुखिया के बेटे पर भी विधायक की शिकायत पर मुकदमा दायर हुआ है. विधायक और थानेदार के बीच बातचीत का एक दो मिनट का ऑडियो भी वायरल हुआ था. इस ऑडियो के वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया. विधायक ने सवाल किया था कि थानेदार से उनकी 11 मिनट तक बातचीत हुई थी. सिर्फ 2 मिनट का ऑडियो ही क्यों वायरल कराया गया? किसने ऑडियो वायरल किया? उसके बाद विधायक समर्थकों का आक्रोश और बढ़ गया. 

फिर इस मामले को झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने "टेक अप" किया. पहले पुलिस एसोसिएशन ने विधायक से माफी  मांगने को कहा, जब विधायक ने कहा कि वह जान दे देंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे. फिर मामला और तूल पकड़ता गया, फिर पुलिस एसोसिएशन ने 8 सितंबर से आंदोलन की घोषणा की. कई चरणों में आंदोलन की बात कही गई. लेकिन फिलहाल झारखंड के कैबिनेट मंत्री के निधन और पूरे राज्य में शोक की वजह से आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. वहीं दिलीप चौधरी के निष्कासन से यह बात तो साफ हो गई है कि पार्टी के अंदर भी हुए विवाद के कारणों  को ढूंढा जा रहा है और इसी क्रम में दिलीप चौधरी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया है. यह मामला फिलहाल विधायक और पुलिस अधिकारियो में आर-पार का दिख रहा है. 

रिपोर्ट - प्रकाश महतो