श्रावणी मेला 2026: इस सावन बन रहा दुर्लभ संयोग, चारों सोमवार होंगे खास, जानिए कैसे करें भगवान शिव की पूजा

श्रावणी मेला 2026: इस सावन बन रहा दुर्लभ संयोग, चारों सोमवार होंगे खास, जानिए कैसे करें भगवान शिव की पूजा

देवघर(DEOGHAR): सावन का महीनाइस साल 30 अगस्त को शुरू होने जा रहा है. ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार से शुरू होने वाला सावन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. इस बार सावन में पड़ने वाले चारों सोमवार विशेष तिथियों के साथ आ रहे हैं, जिससे यह संयोग और भी दुर्लभ माना जा रहा है. अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं बैद्यनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पंडित दुर्लभ मिश्रा के अनुसार इस बार चारों सोमवार नाग पंचमी, सावन महाशिवरात्रि, संक्रांति के साथ शुक्ल पक्ष पंचमी और द्वादशी जैसी महत्वपूर्ण तिथियों के साथ पड़ रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है, इसलिए शिव भक्तों के लिए इस बार का सावन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है. उन्होंने बताया कि भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, बेलपत्र, चावल, रोली, पुष्प, फल और नैवेद्य से अभिषेक कर शिव चालीसा तथा शिव आरती करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है.

आपको बता दें, पंडित दुर्लभ मिश्रा के अनुसार पहली सोमवारी 3 अगस्त को कृष्ण पक्ष पंचमी यानी नाग पंचमी के दिन पड़ेगी. इस दिन भगवान शिव को जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने के साथ नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है. दूसरी सोमवारी 10 अगस्त को त्रयोदशी तिथि और सावन महाशिवरात्रि के अद्भुत संयोग में आएगी. इस दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक कर चंदन, चावल, फल और नैवेद्य अर्पित करने के बाद पंचाक्षर मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है. तीसरी सोमवारी 17 अगस्त को संक्रांति और शुक्ल पक्ष पंचमी के साथ होगी, जिसे नाग पंचमी, मनसा पूजा और बंगला सावन की सोमवारी के रूप में भी मनाया जाएगा. इस दिन भगवान शिव को गुड़ वाली खीर का भोग लगाने और पंचोपचार पूजन करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है. वहीं चौथी सोमवारी 24 अगस्त को द्वादशी तिथि पर पड़ेगी, जिस दिन विधि-विधान से शिव पूजा करने पर सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास जताया जाता है.

श्रावण मास को लेकर बैद्यनाथ धाम समेत देशभर के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां भी तेज हो गई हैं. धार्मिक जानकारों का मानना है कि ग्रह, नक्षत्र, वार और तिथियों के इस दुर्लभ संयोग के कारण इस बार चारों सोमवार को भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंच सकते हैं. खासकर बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है. पंडित दुर्लभ मिश्रा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे श्रद्धा, आस्था और शास्त्रों में बताए गए विधि-विधान के अनुसार भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें. उनका कहना है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से भक्तों को आध्यात्मिक शांति के साथ जीवन में सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.